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मार्च, 20, 2026
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Chaitra Navratri 2024: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और आरती से पाएं अक्षय पुण्य

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Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व, जो मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का महापर्व है, अपने दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। यह दिन तप, संयम और वैराग्य की अधिष्ठात्री देवी को नमन करने का विशेष अवसर है। इस दिन माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Chaitra Navratri 2024: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और आरती से पाएं अक्षय पुण्य

Chaitra Navratri का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। यह स्वरूप तपस्या और वैराग्य का प्रतीक है, जिसमें मां शांत मुद्रा में श्वेत वस्त्र धारण किए, दाएं हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल लिए सुशोभित होती हैं। जो भक्त पूर्ण निष्ठा के साथ इस दिन देवी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से समस्त विघ्न दूर होते हैं और उन्हें अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

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Chaitra Navratri में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

सनातन धर्म में मां ब्रह्मचारिणी की महिमा अपरंपार बताई गई है। यह देवी का वह स्वरूप है, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इस घोर **तपस्या** के कारण ही उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। यह स्वरूप हमें जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए अदम्य साहस और दृढ़ता से निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन की गई साधना और तपस्या से व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है।

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि:
* प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें।
* मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
* माता को अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, फल, मिष्ठान और पंचामृत अर्पित करें।
* विशेष रूप से सफेद पुष्प (जैसे कमल या चमेली) और शक्कर का भोग लगाएं, क्योंकि माता को शक्कर और मिश्री अत्यंत प्रिय हैं।
* दीपक और धूप जलाकर माता की स्तुति करें।
* संभव हो तो ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
* अंत में मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें।

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन, द्वितीया तिथि पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त:

| तिथि | वार | शुभ मुहूर्त |
| :————— | :——- | :—————— |
| चैत्र शुक्ल द्वितीया | मंगलवार | प्रातः 06:15 से 07:50 तक |
| | | दोपहर 12:20 से 01:55 तक |

यह मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है। पूजा सदैव शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में करना उत्तम माना जाता है।

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माता ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र:

दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मंत्र जाप करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती:
जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखाती हो॥
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिससे मिलें हैं शिव शंभू प्यारा॥
शंकर जी को पति रूप में पायो।
इस कारण जन्म सफल कर आयो॥
सुंदर मुख पर कांति निराली।
ज्ञान की ज्योति है उजियाली॥
जिसने तुम्हें निज ध्यान लगाया।
ज्ञान की गंगा में गोता लगाया॥
तुम्हारी दया है अनंत अपारा।
जिससे मिले हैं शिव का सहारा॥
जय ब्रह्मचारिणी जग कल्याणी।
कष्ट हरो दुख हरो भवानी॥

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इस प्रकार, Chaitra Navratri के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना हमें जीवन में धैर्य, संयम और तपस्या का महत्व सिखाती है। जो साधक इस दिन विधि-विधान से देवी की पूजा और आरती करते हैं, उन्हें कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और उनके जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और तपस्या से जुड़ी वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माता की कृपा से आपके सभी मनोरथ पूर्ण हों।
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