
Chaitra Vinayak Chaturthi 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता माने जाते हैं। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए जानते हैं चैत्र विनायक चतुर्थी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से।
चैत्र मास की विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है क्योंकि यह नव संवत्सर के आरंभ के बाद पड़ने वाली पहली चतुर्थी होती है। इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश का पूजन करने से व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इस वर्ष चैत्र विनायक चतुर्थी 22 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनका लाभ भक्तों को अवश्य मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।
चैत्र विनायक चतुर्थी 2026: व्रत का महत्व और लाभ
चैत्र विनायक चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 मार्च 2026 को पड़ेगी। इस दिन रवि योग और भद्रावास योग का भी संयोग बन रहा है, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ फलदायी है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि आरंभ | 21 मार्च 2026, शाम 07:15 बजे से |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 22 मार्च 2026, शाम 05:20 बजे तक |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | 22 मार्च 2026, सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक |
| रवि योग आरंभ | 22 मार्च 2026, सुबह 06:15 बजे से |
| रवि योग समाप्त | 22 मार्च 2026, दोपहर 02:40 बजे तक |
भगवान गणेश की पूजा विधि
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना विशेष विधि-विधान से की जाती है।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- भगवान गणेश को धूप, दीप, रोली, चंदन, अक्षत, दूर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- गणेश चालीसा का पाठ करें और व्रत कथा सुनें।
- अंत में आरती कर सभी को प्रसाद वितरित करें।
- इस दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता है, फलाहार व्रत रखा जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
व्रत का महत्व और लाभ
चैत्र विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं, इनकी पूजा से छात्रों को विद्या में सफलता मिलती है। विवाहित महिलाएं संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। अविवाहितों को शीघ्र विवाह का वरदान मिलता है। रवि योग में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
रवि योग और भद्रावास योग का प्रभाव
इस वर्ष चैत्र विनायक चतुर्थी पर रवि योग का निर्माण हो रहा है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। रवि योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं और उनका सकारात्मक परिणाम मिलता है। वहीं, भद्रावास योग का प्रभाव भी इस दिन रहेगा, जिसके लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए, हालांकि पूजा पाठ पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। इन शुभ योगों के साथ पूजा करने से भगवान गणेश भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं।
संकटों से मुक्ति के लिए गणेश मंत्र
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह मंत्र बाधाओं को दूर कर जीवन में शांति और समृद्धि लाता है।
ॐ गं गणपतये नमः।
निष्कर्ष और उपाय
चैत्र विनायक चतुर्थी का यह पावन पर्व भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजन करने से भगवान गणेश प्रसन्न होकर भक्तों के सभी विघ्न हर लेते हैं। इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना, जरूरतमंदों को दान करना और गणेश मंदिर में जाकर दर्शन करना विशेष फलदायी होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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