
Divorce Yog: वैवाहिक जीवन की पवित्रता और मधुरता बनाए रखने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई महत्वपूर्ण योगों का विश्लेषण किया गया है। परंतु कभी-कभी ग्रहों की विशेष स्थितियाँ दांपत्य जीवन में अलगाव या तलाक की स्थिति भी उत्पन्न कर देती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में लग्नेश, सप्तमेश और चंद्रमा की विपरीत स्थिति, सप्तम भाव पर पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु, मंगल) का प्रभाव या शुक्र का कमजोर होना वैवाहिक जीवन में तनाव और अलगाव की स्थिति बना सकता है। जब इन ग्रहों की दशाएं और गोचर विपरीत होते हैं, तब रिश्तों में दरार आने की संभावना बढ़ जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन से ऐसे ज्योतिषीय संकेत हैं जो इस प्रकार के Kundali Dosh की ओर इशारा करते हैं, ताकि समय रहते उचित उपाय किए जा सकें।
Divorce Yog: क्या आपकी कुंडली में भी है तलाक का योग? जानिए ज्योतिषीय कारण और बचाव के उपाय
कुंडली में Divorce Yog बनाने वाले मुख्य कारक
लग्न, सप्तमेश और चंद्रमा की स्थिति: लग्न का स्वामी कमजोर होना या छठे, आठवें, बारहवें भाव में स्थित होना व्यक्ति के व्यक्तित्व को कमजोर करता है, जिससे वह वैवाहिक संबंधों को संभालने में असमर्थ हो सकता है। सप्तम भाव विवाह का मुख्य भाव है और इसका स्वामी (सप्तमेश) यदि पाप ग्रहों से पीड़ित हो, अस्त हो या नीच राशि में हो, तो वैवाहिक सुख में कमी आती है। चंद्रमा मन का कारक है; यदि चंद्रमा पीड़ित हो, राहु-केतु के प्रभाव में हो या नीच राशि में हो, तो मन अशांत रहता है और व्यक्ति भावनात्मक रूप से अस्थिर होता है, जो रिश्तों में समस्या पैदा करता है।
पाप ग्रहों का सप्तम भाव पर प्रभाव: सप्तम भाव पर शनि, राहु, केतु और मंगल जैसे पाप ग्रहों का सीधा प्रभाव या दृष्टि वैवाहिक जीवन में कटुता लाती है।
- शनि: सप्तम भाव में शनि का होना विवाह में देरी, अलगाव या अत्यधिक जिम्मेदारियों के कारण संबंधों में नीरसता ला सकता है। इसकी तीसरी, सातवीं या दसवीं दृष्टि भी विवाह सुख पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
- मंगल: सप्तम में मंगल मांगलिक दोष बनाता है, जो यदि सही साथी के साथ विवाह न हो तो अत्यधिक क्रोध, विवाद और अलगाव का कारण बन सकता है।
- राहु-केतु: सप्तम भाव में राहु या केतु का होना भ्रम, धोखे या अप्रत्याशित समस्याओं का कारण बनता है, जिससे रिश्ते में अस्थिरता आती है। राहु-केतु अक्ष पर अन्य ग्रहों का आना भी समस्याओं को बढ़ाता है।
शुक्र का कमजोर होना: शुक्र ग्रह प्रेम, संबंध, वैवाहिक सुख और भौतिक सुखों का कारक है। यदि कुंडली में शुक्र कमजोर, अस्त, नीच राशि में या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य की कमी आती है। यह संबंधों में अरुचि या असंतोष पैदा कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
छठा, अष्टम और द्वादश भाव का संबंध: छठा भाव ऋण, रोग, शत्रु और विवाद का है। अष्टम भाव आयु, गुप्त रहस्य और बाधाओं का है। बारहवां भाव व्यय, हानि, अलगाव और मोक्ष का है। यदि इन भावों के स्वामी का संबंध सप्तम भाव या सप्तमेश से बनता है, तो वैवाहिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो तलाक का कारण भी बन सकती हैं।
इन सभी Kundali Dosh के बावजूद, यह समझना आवश्यक है कि ज्योतिष केवल संभावनाएँ दर्शाता है। सही समय पर उचित उपाय और कर्म करने से इन दोषों के नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उपाय
- ग्रहों की शांति: यदि कुंडली में कोई विशिष्ट ग्रह कमजोर या पीड़ित है, तो संबंधित ग्रह के मंत्रों का जाप, दान और रत्न धारण करना लाभकारी होता है।
- शिव-पार्वती पूजा: वैवाहिक जीवन में स्थिरता और प्रेम के लिए शिव-पार्वती की नियमित पूजा और व्रत करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- शुक्र को मजबूत करें: शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को सफेद वस्तुओं का दान करें, जैसे चावल, दूध, चीनी।
- मंगल दोष निवारण: यदि मांगलिक दोष है, तो उसका विधि-विधान से निवारण करवाएँ।
- सप्तमेश को बलवान करें: सप्तमेश ग्रह के मंत्रों का जाप करें और संबंधित देवता की आराधना करें।
- आपसी समझ: ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ, पति-पत्नी के बीच आपसी समझ, संवाद और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
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