
Durga Aarti: ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों का आवाहन करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अत्यंत पावन माध्यम है। माँ दुर्गा की आरती भक्ति और श्रद्धा का सर्वोच्च प्रतीक है, जो साधक के मन को शांति और आत्मा को नई चेतना प्रदान करती है।
मां दुर्गा आरती: सही समय और महत्व
Durga Aarti आध्यात्मिक साधना का एक महत्वपूर्ण अंग है। माँ दुर्गा, शक्ति का साकार रूप हैं, और उनकी आरती करने से भक्तों को असीम बल, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रातःकाल की आरती से दिनभर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मन शांत और प्रफुल्लित रहता है। वहीं, संध्याकाल की आरती नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा कवच प्रदान करती है, घर में सुख-शांति का वास होता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर दोनों ही समय आरती करने का विशेष फल बताया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसी दिव्य ऊर्जा का स्रोत है जो हर भक्त को माँ के चरणों से जोड़ता है।
दुर्गा आरती का आध्यात्मिक महत्व
माँ दुर्गा की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच का एक गहरा संवाद है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आरती के माध्यम से हम माँ दुर्गा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनसे संसार के समस्त दुखों को हरने का निवेदन करते हैं। यह आरती हमें जीवन में आने वाली हर चुनौती का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है और हमारे भीतर एक दिव्य ऊर्जा का संचार करती है।
आरती करने की विधि
आरती को सही विधि से करने पर उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। यहाँ माँ दुर्गा की आरती करने के कुछ सरल चरण दिए गए हैं:
* एक साफ स्थान पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* शुद्ध घी या तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
* धूप और अगरबत्ती जलाकर वातावरण को सुगंधित करें।
* आरती की थाली में कपूर, पुष्प, कुमकुम, अक्षत (चावल), और अन्य पूजन सामग्री सजाएं।
* घंटी बजाते हुए, पूर्ण श्रद्धा भाव से माँ दुर्गा की आरती का गायन करें।
* आरती के बाद, थाली को सभी दिशाों में घुमाकर देवी-देवताओं को समर्पित करें।
* अंत में, सभी उपस्थित लोगों को आरती का आशीर्वाद दें और प्रसाद वितरण करें।
माँ दुर्गा की आरती का पाठ
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दो नैना चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजे॥
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी॥
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती।
कोटि चंद्र दिवाकर राजत सम ज्योति॥
शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती॥
चण्ड मुण्ड संहारे शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भय दूर करे॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी गावत नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू॥
तुम ही शिव शक्ति तुम ही कमला रानी।
जग पालन पोषण करती तुम शिव पटरानी॥
सकल सम्पदा तुम हो तुम ही भव हरणी।
हमारे संकट हरना तुम ही दुःख हरणी॥
हाथ जोड़कर विनती करते हम सभी प्राणी।
आरती माँ अंबे जी की मंगलमय करनी॥
आरती के उपरांत
माँ दुर्गा की आरती करने से मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह एक सरल परंतु अत्यंत प्रभावशाली उपाय है, जो जीवन की बाधाओं को दूर कर सकारात्मकता लाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक माँ दुर्गा की आरती करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और माँ का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
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