
Eid Ul Fitr 2026: इस्लामी कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण पर्व, ईद-उल-फितर, खुशी और भाईचारे का संदेश लेकर आता है। इस पावन अवसर पर, शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में चांद के दीदार नहीं हुए, जिसके बाद अब शनिवार को ईद की नमाज़ अदा की जाएगी, यह खबर मुस्लिम समुदाय में उत्साह का संचार कर रही है।
ईद उल फितर 2026: चांद का दीदार नहीं, अब शनिवार को अदा होगी नमाज
ईद उल फितर 2026 और अलविदा जुमा का महत्व
रमजान का पवित्र महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। त्याग और तपस्या के इस माह के बाद ईद का पर्व एक नई उमंग और उल्लास लेकर आता है। इस वर्ष, शुक्रवार को चांद का दीदार न होने के कारण, ईद-उल-फितर की नमाज़ अब शनिवार को अदा की जाएगी। शुक्रवार को अलविदा जुमा और रमजान का आखिरी रोजा रखा जाएगा, जिसके बाद बाजारों में रौनक और भी बढ़ जाएगी। यह जानकारी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चंद्र दर्शन का महत्व इस्लामी परंपरा में विशेष है, और इसी के आधार पर ईद की तिथि निर्धारित होती है।
रमजान का महीना अल्लाह की इबादत और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। पूरे एक महीने तक रोजे रखने के बाद, ईद का त्योहार रोजेदारों को अल्लाह का शुक्रिया अदा करने और खुशियां बांटने का अवसर देता है। इस दिन मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज़ अदा की जाती है, जहां लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। त्योहार से पहले ही बाजारों में खूब चहल-पहल देखने को मिल रही है, जहां लोग नए कपड़े, सेवइयां और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
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यह पर्व न केवल खुशियां बांटने का अवसर है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सौहार्द का भी प्रतीक है। ईद हमें प्रेम, शांति और एकता का संदेश देती है। इस शुभ अवसर पर, सभी से अपील है कि वे मिलजुलकर त्योहार मनाएं और समाज में सकारात्मकता का संचार करें। अल्लाह से दुआ है कि यह ईद सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

