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मार्च, 5, 2026
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Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते? जानें इसका गूढ़ रहस्य

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Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पवित्र तिथि भक्तों को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रत्येक एकादशी तिथि अपने आप में एक विशिष्ट ऊर्जा और महत्व समेटे होती है, और ऐसे में षटतिला एकादशी का आगमन भक्तों के लिए असीम पुण्य का द्वार खोलता है।

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Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते? जानें इसका गूढ़ रहस्य

Ekadashi 2026: एकादशी व्रत और चावल का निषेध

14 जनवरी 2026 को पड़ने वाली षटतिला एकादशी एक ऐसा पावन पर्व है, जिस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से समस्त दुःख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है। इस विशेष दिन चावल का सेवन वर्जित होता है, लेकिन क्या आपने कभी इस परंपरा के पीछे छिपी गहरी पौराणिक कथा पर विचार किया है? आइए, हम इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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चावल और एकादशी का पौराणिक संबंध

पौराणिक कथा के अनुसार, माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया था और उनके शरीर के अंश पृथ्वी में समा गए। जहां से जौ और चावल की उत्पत्ति हुई। चूंकि चावल की उत्पत्ति महर्षि मेधा के शरीर से हुई है, इसलिए एकादशी के दिन चावल का सेवन उनके मांस का सेवन करने के समान माना जाता है। इसी कारणवश एकादशी के पावन दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। जो भक्त इस नियम का पालन करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वे पापों से मुक्त होकर पुण्यलोक को प्राप्त करते हैं। यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि एकादशी तिथि पर चावल के दाने भगवान मेधा ऋषि के ही सूक्ष्म स्वरूप माने जाते हैं, इसलिए इस दिन चावल खाना महापाप माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  5 मार्च 2026, गुरुवार का Aaj Ka Panchang: जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्। लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

षटतिला एकादशी के नियम और लाभ

षटतिला एकादशी पर चावल का त्याग कर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस दिन तिल का दान, स्नान और हवन करने का भी विशेष महत्व है। जो भक्त एकादशी के नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, उन्हें न केवल लौकिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि वे आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त बनते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अतः, 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी के पावन अवसर पर चावल का त्याग कर भगवान विष्णु की अराधना करें और उनके दिव्य आशीर्वाद के भागी बनें। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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