
Ekadashi March 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, जब भगवान विष्णु की आराधना कर भक्तजन पुण्य अर्जित करते हैं। मार्च 2026 का महीना दो महत्वपूर्ण एकादशियों – पापमोचनी और कामदा एकादशी – के आध्यात्मिक विचार का समय लेकर आ रहा है। यह पवित्र अवसर भक्तों को अपने पापों से मुक्ति पाने और मनोकामनाएं पूर्ण करने का सुअवसर प्रदान करता है।
Ekadashi March 2026: जानें पापमोचनी और कामदा एकादशी की सही तिथि और महत्व
प्रत्येक एकादशी अपने आप में अनूठी होती है और विशेष फल प्रदान करती है। इस माह में, पापमोचनी एकादशी जहां पापों के शमन का मार्ग प्रशस्त करती है, वहीं कामदा एकादशी सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए जानी जाती है। इन दोनों पावन तिथियों पर व्रत और पूजन विधि का पालन करने से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पापमोचनी एकादशी 2026: तिथि और महत्व
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी विशेष रूप से पापों के निवारण हेतु मानी जाती है। यह व्रत रखने से जाने-अनजाने में हुए समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- तिथि: मंगलवार, 24 मार्च 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च 2026 को दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से
- एकादशी तिथि समाप्त: 24 मार्च 2026 को दोपहर 01 बजकर 21 मिनट तक
- पारण (व्रत खोलने का) समय: 25 मार्च 2026 को सुबह 06 बजकर 21 मिनट से 08 बजकर 44 मिनट तक।
कामदा एकादशी 2026: तिथि और महत्व
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली कामदा एकादशी को सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं और उसे धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह एकादशी मार्च के अंत या अप्रैल के प्रारंभ में पड़ती है, और 2026 में यह अप्रैल माह के आरंभिक दिनों में होगी।
- तिथि: गुरुवार, 09 अप्रैल 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 08 अप्रैल 2026 को सुबह 07 बजकर 44 मिनट से
- एकादशी तिथि समाप्त: 09 अप्रैल 2026 को सुबह 08 बजकर 32 मिनट तक
- पारण (व्रत खोलने का) समय: 10 अप्रैल 2026 को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से 04 बजकर 09 मिनट तक।
Ekadashi March 2026: व्रत विधि और पारण समय
एकादशी का व्रत अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
पूजा विधि
- एकादशी के एक दिन पूर्व दशमी तिथि को एक ही बार सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं, वस्त्र, चंदन, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
- एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- आरती करें और दिनभर ‘‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’’ मंत्र का जाप करें।
- रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन, द्वादशी तिथि को, शुभ मुहूर्त में पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें।
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
इन एकादशियों का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मकता का अनुभव होता है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का भी एक महत्वपूर्ण साधन माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन पवित्र दिनों पर व्रत रखने से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
निष्कर्ष एवं उपाय
एकादशी व्रत मात्र उपवास नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण, शुद्धि और भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। इन दिनों पर अन्न का त्याग करने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं।
- एकादशी के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। वस्त्र, अन्न या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
- तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और संध्या में दीपक प्रज्ज्वलित करें।
- संभव हो तो गौशाला में सेवा करें या गायों को चारा खिलाएं।
- परिवार के साथ मिलकर भगवान विष्णु के भजनों का गायन करें।
यह आध्यात्मिक यात्रा हमें भगवान के करीब लाती है और जीवन को सार्थक बनाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


