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Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों की शांति और ग्रह दोष निवारण का पावन अवसर

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Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या 2026: पितरों की शांति और ग्रह दोष निवारण का पावन अवसर

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Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व और पितृ कर्म

आज 17 फरवरी 2026, दिन मंगलवार को फाल्गुन मास की अमावस्या है, जो ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पावन तिथि पितरों की शांति, तर्पण और ग्रह दोषों के निवारण के लिए विशेष फलदायी होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि शाम 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, जिसमें पितृ तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को सम्पन्न करना अत्यंत शुभकारी माना गया है।

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Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या का महत्व और पूजा विधि

फाल्गुन अमावस्या के दिन स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने का विशेष विधान है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या का संयोग इसे और भी प्रभावी बना देता है, क्योंकि यह हनुमान जी की पूजा और मंगल ग्रह से संबंधित दोषों के निवारण के लिए भी उत्तम मानी जाती है।

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फाल्गुन अमावस्या की पूजा विधि:

* सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
* सूर्य देव को अर्घ्य दें और पितरों का स्मरण करें।
* साफ़ वस्त्र धारण कर अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान का संकल्प लें।
* पितरों की संतुष्टि के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराएं या अन्न, वस्त्र आदि का दान करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* पीपल के वृक्ष की पूजा करें और जल चढ़ाएं। पीपल में त्रिदेवों का वास माना जाता है।
* गरीबों और जरूरतमंदों को अपनी श्रद्धा अनुसार दान दें।

ग्रह शांति और पितृ दोष निवारण उपाय:

फाल्गुन अमावस्या पर ग्रह दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं:

* इस दिन काले तिल, गुड़, उड़द की दाल और चावल का दान करने से शनि दोष शांत होते हैं।
* पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितृ स्तोत्र का पाठ करें और दक्षिण दिशा में दीपक प्रज्वलित करें।
* हनुमान मंदिर में चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाएं तथा हनुमान चालीसा का पाठ करें।
* अमावस्या की शाम को मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
* पितरों की शांति के लिए किसी पवित्र स्थान पर रुद्राभिषेक करा सकते हैं।

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मंत्र:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
ॐ पितृभ्यः नमः।

यह फाल्गुन अमावस्या का पावन दिन हमें अपने पितरों को स्मरण करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन किए गए पुण्य कर्म अनेक जन्मों के पापों का शमन करते हैं और हमारे जीवन को आध्यात्मिक शांति से भर देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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