

Falgun Purnima 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का दिन अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन होलिका दहन के रूप में भी विख्यात है, जब असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस पवित्र तिथि को लेकर भक्तों के मन में कुछ शंकाएं हैं। आइए, इस आलेख के माध्यम से हम फाल्गुन पूर्णिमा 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की पौराणिक कथा का विस्तृत वर्णन करें।
Falgun Purnima 2026: कब है फाल्गुन पूर्णिमा? जानें तिथि और धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पूर्णिमा चैत्र मास की शुरुआत से ठीक पहले आती है और होलिका दहन के पर्व से जुड़ी हुई है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा बुधवार, 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन संध्याकाल में होलिका दहन किया जाएगा। इस शुभ अवसर पर लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
Falgun Purnima 2026 पर होलिका दहन की पौराणिक कथा
होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद और उसकी बुआ होलिका से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक एक अत्यंत अहंकारी राक्षस राजा था, जिसे वरदान प्राप्त था कि उसे कोई मनुष्य, पशु, अस्त्र या शस्त्र, दिन या रात, घर के भीतर या बाहर नहीं मार सकता। हिरण्यकश्यप चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें, परंतु उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। प्रहलाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार मारने का प्रयास किया, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। अंततः, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहा और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। यह घटना फाल्गुन पूर्णिमा के दिन घटित हुई थी, इसलिए इस दिन होलिका दहन कर बुराई के अंत का प्रतीक मनाया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन विशेष समय पर होता है। वर्ष 2026 में, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि इस प्रकार है:
* **पूर्णिमा तिथि आरंभ:** 3 मार्च 2026, बुधवार को सुबह 09 बजकर 59 मिनट पर
* **पूर्णिमा तिथि समाप्त:** 4 मार्च 2026, गुरुवार को सुबह 06 बजकर 19 मिनट पर
* **होलिका दहन:** 3 मार्च 2026, बुधवार (संध्याकाल में)
होलिका दहन की पूजा विधि अत्यंत सरल होती है:
* होलिका दहन के लिए लकड़ियों, उपलों और घास का ढेर एकत्रित करें।
* होलिका दहन से पहले इसकी विधिवत पूजा करें। पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और नारियल का प्रयोग करें।
* होलिका के चारों ओर कच्चा सूत सात बार लपेटें।
* जल अर्पित करते हुए होलिका दहन की परिक्रमा करें।
* इसके पश्चात, शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्ज्वलित करें।
होलिका दहन के बाद राख को घर लाना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सुख-शांति लाती है।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: निष्कर्ष और उपाय
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का पावन पर्व हमें अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। इस दिन होलिका दहन करके हम अपने भीतर की बुराइयों और नकारात्मक विचारों को भी जला देते हैं। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और भक्त प्रहलाद का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और कष्टों का निवारण होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन दान-पुण्य और स्नान का भी विशेष महत्व है, जो मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।

