

Falgun Purnima: सनातन धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पावन तिथि पर विधि-विधान से की गई पूजा जन्म-जन्मांतर के पुण्यों का संचार करती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: जानिए पूजा विधि, सामग्री और इसका महत्व
Falgun Purnima व्रत और पूजन का महात्म्य
Falgun Purnima: हिन्दू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को पड़ रही है। यह वह विशेष दिन है जब चंद्र देव अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी को अपनी अमृतमयी किरणों से सींचते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की उपासना करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। आइए जानते हैं इस पावन दिन पर पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और सामग्री के बारे में।
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प्रमुख पूजन मुहूर्त
| तिथि | प्रारंभ | समापन |
|---|---|---|
| फाल्गुन पूर्णिमा | 01 मार्च 2026, रात्रि 09:47 बजे | 02 मार्च 2026, रात्रि 01:14 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त | 02 मार्च 2026, प्रातः 05:07 बजे | प्रातः 05:55 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त | 02 मार्च 2026, दोपहर 12:00 बजे | दोपहर 12:48 बजे |
| चंद्र अर्घ्य समय | 02 मार्च 2026, सायं 06:20 बजे | सायं 07:00 बजे |
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: पूजन सामग्री
फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री अवश्य जुटा लें:
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र
- चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए पात्र
- रोली, चंदन, हल्दी, चावल (अक्षत)
- मोली (कलावा)
- फूल (कमल, गुलाब, गेंदा), फूलों की माला
- तुलसी दल (भगवान विष्णु के लिए)
- धूप, दीपक (घी का), माचिस
- फल (केला, सेब, मौसमी फल), मिठाई (खीर, बताशे)
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल का मिश्रण)
- गंगाजल या शुद्ध जल
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची
- वस्त्र (भगवान को अर्पित करने हेतु), दक्षिणा
- कपूर, अगरबत्ती
फाल्गुन पूर्णिमा पूजा विधि
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इस विधि से करें पूजन:
- प्रातःकाल उठकर सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पवित्र नदियों या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।
- एक चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- सर्वप्रथम भगवान गणेश का आह्वान करें।
- विष्णु और लक्ष्मी जी को रोली, चंदन, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीपक अर्पित करें।
- पंचामृत और खीर का भोग लगाएं। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
- पूजन के बाद सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
- संध्याकाल में चंद्रोदय के समय चंद्रदेव को जल में दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य दें।
- चंद्रदेव की पूजा करने से मानसिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- पूजा के उपरांत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा का दिन केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दान-पुण्य और तपस्या के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने से चंद्रमा संबंधी दोष दूर होते हैं और कुंडली में चंद्र की स्थिति मजबूत होती है। इस विशेष तिथि के शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी होते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु स्वयं भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लक्ष्मी जी की उपासना से घर में कभी धन की कमी नहीं होती और सुख-शांति बनी रहती है। यह दिन होलाष्टक की समाप्ति का भी प्रतीक है, जिसके बाद रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है।
चंद्रदेव का विशेष मंत्र
फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः।
फाल्गुन पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई उपासना निश्चित रूप से फलदायी होती है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों को भी शांति मिलती है। यह दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और सभी कष्टों को दूर करता है।

