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मार्च, 25, 2026
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गणगौर व्रत कथा: अखंड सौभाग्य का दिव्य पर्व

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Gangaur Vrat Katha: गणगौर 2026 का पावन पर्व 21 मार्च को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और त्याग का प्रतीक है, जो सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्रदान करने वाला माना जाता है।

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गणगौर का पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन, महिलाएं गौरी माता की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं, जिन्हें भगवान शिव ने स्वयं ‘सौभाग्य’ का वरदान दिया था। यह पर्व प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत सुहागिनों के लिए पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए, जबकि कुंवारी कन्याओं के लिए उत्तम वर की प्राप्ति हेतु किया जाता है।

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गणगौर व्रत कथा का महत्व और विधि

गणगौर पूजा विधि अत्यंत सरल और भक्तिपूर्ण है।

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  • गणगौर के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • लकड़ी की चौकी पर शिव-पार्वती (गण और गौर) की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से प्रतिमाओं को शुद्ध करें और उन्हें नए वस्त्र पहनाएं।
  • उन्हें सिंदूर, रोली, अक्षत, मेहंदी, काजल, चूड़ियां, आदि सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • फूलों, दूब, मोली और विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं।
  • गणगौर के गीत गाएं और कथा का श्रवण करें।
  • अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

शुभ मुहूर्त

पूजा का दिनतिथिमुहूर्त
शनिवार, 21 मार्च 2026चैत्र शुक्ल तृतीयासुबह 06:20 से दोपहर 12:45 तक
तृतीया तिथि का आरंभ20 मार्च 2026, रात्रि 10:15 बजे
तृतीया तिथि का समापन21 मार्च 2026, रात्रि 08:30 बजे

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव, माता पार्वती और नारद जी पृथ्वी भ्रमण पर निकले। चलते-चलते वे एक गांव में पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। गांव की संपन्न स्त्रियों ने उनके लिए विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए। इसके बाद वे उस गांव के गरीब और निर्धन लोगों के पास पहुंचे। वहां, एक वृद्ध महिला ने अपनी पूरी श्रद्धा और सामर्थ्य से शिव-पार्वती को भोग लगाया। माता पार्वती उसकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुईं और उसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति ही ईश्वर को प्रिय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी दिन, माता पार्वती अपने मायके से विदा होकर भगवान शिव के साथ अपने घर आई थीं।

ओम जय गौरी शुभदायिनी,
जय माँ मंगला माता।
अखंड सौभाग्य देहु वरदा,
कल्याणी जगत त्राता।।

निष्कर्ष और उपाय

गणगौर का व्रत न केवल वैवाहिक सुख प्रदान करता है, बल्कि यह परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी लाता है। इस दिन महिलाएं यदि विधि-विधान से गौरी माता की पूजा करती हैं, तो उन्हें मनचाहा फल प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। व्रत के दिन गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराने से विशेष पुण्य मिलता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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