

Gudi Padwa 2026: भारतीय संस्कृति और आध्यात्म में पर्वों का विशेष महत्व है, जो हमें अपनी समृद्ध परंपराओं से जोड़ते हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि एक ऐसा ही पावन अवसर लेकर आती है, जब देशभर में गुड़ी पड़वा का महापर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल एक नए हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के नवजीवन और सृजन का भी साक्षी बनता है।
Gudi Padwa 2026: पावन पर्व और इसका आध्यात्मिक महत्व
गुड़ी पड़वा का पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन कई मान्यताओं और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादि, जबकि गोवा और केरल में कोंकणी हिंदुओं द्वारा संवत्सर पड़वो के नाम से जाना जाता है। इस दिन से ही शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।
Gudi Padwa 2026: तिथि और इसका आध्यात्मिक महत्व
गुड़ी पड़वा मुख्यतः दो कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन सृजन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही, यह भी माना जाता है कि भगवान श्रीराम लंका विजय के पश्चात 14 वर्ष के वनवास के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे थे। इस खुशी में अयोध्यावासियों ने अपने घरों पर पताकाएं (गुड़ी) लगाकर उत्सव मनाया था। इसके अलावा, सम्राट शालिवाहन ने इसी दिन शकों पर विजय प्राप्त की थी, जिसके उपलक्ष्य में ‘शालिवाहन शक’ संवत की शुरुआत हुई। यह पर्व किसानों के लिए नई फसल के आगमन का भी संकेत देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गुड़ी पड़वा पूजा विधि
गुड़ी पड़वा के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।
* इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* घर की साफ-सफाई करें और मुख्य द्वार पर आम और अशोक के पत्तों से तोरण लगाएं। रंगोली बनाना भी शुभ माना जाता है।
* एक बांस की लकड़ी को नए और पीले या केसरिया रंग के वस्त्र से सजाएं। इसे पीतल या चांदी के कलश से ढक दें।
* नीम के पत्ते, आम के पत्ते, फूलों की माला और मिश्री की माला या बताशे की माला से गुड़ी को सजाएं।
* गुड़ी को घर के मुख्य द्वार पर या खिड़की से बाहर की ओर लगाएं, इस प्रकार कि उसका मुख पूर्व दिशा की ओर हो।
* भगवान ब्रह्मा और विष्णु की पूजा करें और गुड़ी को धूप-दीप दिखाएं।
* इसके पश्चात, नीम और गुड़ का मिश्रण प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गुड़ी पड़वा 2026 शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा का पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाएगा।
यह तिथि मार्च 2026 में पड़ेगी।
| तिथि | विवरण |
| :———– | :—————– |
| प्रतिपदा तिथि | चैत्र शुक्ल पक्ष |
| वर्ष | 2026 |
इस शुभ दिन पर, नए कार्यों की शुरुआत करना, नए व्यापार का आरंभ करना और गृह प्रवेश जैसे कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
गुड़ी पड़वा का महत्व और उपाय
गुड़ी पड़वा का पर्व हमें पुरानी बुराइयों को छोड़कर एक हिंदू नववर्ष की सकारात्मक शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। इस दिन नीम और गुड़ का मिश्रण खाने की परंपरा है, जिसका वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्व भी है। नीम जहाँ रक्त को शुद्ध करता है, वहीं गुड़ ऊर्जा प्रदान करता है। यह वर्ष भर स्वस्थ और निरोगी रहने का प्रतीक है। इस दिन भगवान ब्रह्मा और विष्णु का ध्यान करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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ॐ ब्रह्मदेवाय नमः।
इस पावन अवसर पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गुड़ी पड़वा का यह पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने, अपनी परंपराओं का सम्मान करने और नए वर्ष को सकारात्मक ऊर्जा के साथ शुरू करने का अवसर देता है। सभी भक्तजनों को गुड़ी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाएं।


