Guru Pradosh Vrat 2026: नववर्ष 2026 का आगमन शिव भक्ति के एक अनुपम संयोग के साथ हो रहा है, क्योंकि साल का पहला ही दिन गुरु प्रदोष व्रत के पावन अवसर पर पड़ रहा है। यह शिव भक्तों के लिए अत्यंत विशेष और फलदायी संकेत माना जाता है, जब भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नववर्ष 2026 में गुरु प्रदोष व्रत: महादेव की विशेष कृपा का पावन अवसर
गुरु प्रदोष व्रत 2026: नववर्ष का शुभारंभ और शिव पूजन
यह अत्यंत शुभ संयोग है कि नववर्ष का प्रथम दिवस, 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत के साथ आ रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है और इसका धार्मिक ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। इस पवित्र अवसर पर सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना व्यक्ति के सभी पापों का नाश करती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शिव कृपा प्राप्त करने के लिए यह दिन सर्वोत्तम है, क्योंकि गुरु प्रदोष व्रत के प्रभाव से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
गुरु प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि
- गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और गन्ने का रस अर्पित करें।
- इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन और फूल माला चढ़ाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और दीपक प्रज्वलित करें।
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में पुनः शिव मंदिर जाएं या घर पर ही पूजा करें।
- शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और व्रत कथा का श्रवण करें।
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारें और प्रसाद वितरित करें।
गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय | तिथि |
|---|---|---|
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 31 दिसंबर 2025, रात्रि 07:20 बजे | बुधवार |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 01 जनवरी 2026, रात्रि 09:10 बजे | गुरुवार |
| प्रदोष काल पूजा मुहूर्त | 01 जनवरी 2026, सायं 05:45 बजे से 08:20 बजे तक | गुरुवार |
गुरु प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित होता है। जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है, रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। नए साल के पहले दिन इस पवित्र व्रत का संयोग बनना यह दर्शाता है कि यह वर्ष शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी और मंगलमय रहने वाला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती की आराधना करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है और मन को शांति मिलती है, जिससे जीवन में शिव कृपा सदैव बनी रहती है।
शिव पूजन हेतु प्रभावशाली मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
नए वर्ष 2026 का आरंभ गुरु प्रदोष व्रत के साथ होना एक अद्भुत और पवित्र संयोग है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सभी कार्य सिद्ध होते हैं। इस पावन अवसर पर शिव चालीसा का पाठ करें और गरीब व जरूरतमंद लोगों को दान करें। ऐसा करने से महादेव की असीम कृपा सदैव आप पर बनी रहेगी और नववर्ष आपके लिए अत्यंत मंगलकारी सिद्ध होगा।




