
Guru Ravidas Jayanti 2026: हर वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि को संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जाती है, जो हमें उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करती है। यह पावन दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे एक महान संत ने अपने कर्म, विचार और निर्मल भक्ति से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, भेदभाव और अस्पृश्यता की कुरीतियों को चुनौती दी। उनके बताए मार्ग पर चलकर हम समता और सद्भाव से परिपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं।
गुरु रविदास जयंती 2026: माघ पूर्णिमा का पावन पर्व और संत रविदास का संदेश
गुरु रविदास जयंती 2026: कब है यह पावन पर्व और क्या है इसका महत्व?
यह पावन पर्व माघ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो भारतीय पंचांग के अनुसार अत्यधिक महत्वपूर्ण तिथि है। संत रविदास ने अपनी वाणी और आचरण से यह सिद्ध कर दिया कि कोई भी व्यक्ति अपने जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। उन्होंने जातिवाद का खंडन करते हुए प्रेम, भाईचारा और मानव सेवा का संदेश दिया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गुरु रविदास जी के भजनों और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण कर भक्तजन इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और सत्संग का आयोजन करते हैं।
संत रविदास के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा धर्म मानव सेवा में निहित है और ईश्वर की प्राप्ति बाह्य आडंबरों से नहीं बल्कि हृदय की शुद्धता और निस्वार्थ कर्मों से होती है। उनकी शिक्षाओं ने लाखों लोगों को प्रेरित किया और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद की। इस दिन मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जहां उनके दोहों और पदों का गायन किया जाता है।
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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। संत रविदास जी का जीवन एक प्रेरणास्त्रोत है, जो हमें आत्मचिंतन और समाज सेवा के लिए प्रेरित करता है। उनका यह मानना था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा, अर्थात् यदि हमारा मन शुद्ध है तो हमें हर जगह ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव होगा। यह दिवस हमें सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक उन्नति के पथ पर आगे बढ़ने का अवसर देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





