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फ़रवरी, 11, 2026
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हिंदू नव वर्ष 2026: विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ और चैत्र नवरात्रि

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Hindu New Year 2026: सनातन धर्म में प्रत्येक नए वर्ष का आगमन केवल कैलेंडर की तारीखों का बदलना नहीं, अपितु प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा के एक नए चक्र का आरंभ होता है। यह पावन अवसर भक्तों के हृदय में नई आशा, ऊर्जा और संकल्पों का संचार करता है।

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हिंदू नव वर्ष 2026: विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ और चैत्र नवरात्रि

सनातन पंचांग के अनुसार, हिंदू नववर्ष 2026 का शुभागमन मार्च 2026 में होगा। इस पवित्र दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से विक्रम संवत 2083 का विधिवत आरंभ माना जाएगा। यह तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन से मां दुर्गा की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। नवसंवत्सर का यह प्रथम दिवस ब्रह्मदेव द्वारा सृष्टि की रचना के दिवस के रूप में भी पूजित है, इसलिए इस दिन किए गए शुभ कार्य और संकल्प विशेष फलदायी होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व भारत के विभिन्न राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी, चेती चांद, नवरेह जैसे भिन्न-भिन्न नामों और परंपराओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाया जाता है, जो भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का प्रतीक है। इस दिन घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, नए कार्यों का आरंभ किया जाता है और लोग एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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हिंदू नव वर्ष 2026 की तिथि और इसका आध्यात्मिक महत्व

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह दिन केवल एक नए वर्ष की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रकृति में नवजीवन के संचार का भी प्रतीक है। शीत ऋतु की समाप्ति के बाद वसंत का आगमन होता है, पेड़-पौधों में नई कोंपलें फूटती हैं और वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी दिन घटस्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। यह समय आत्मशुद्धि, तपस्या और देवी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान भक्त उपवास रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और विशेष अनुष्ठान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको ऐसे ही पावन अवसरों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

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यह भी पढ़ें:  Pradosh Vrat: फरवरी 2026 का पहला प्रदोष व्रत... क्या है शिव कृपा प्राप्ति का महत्व, जानिए प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू नववर्ष का यह पावन अवसर हमें अपने भीतर सकारात्मकता और आध्यात्मिकता को जगाने का संदेश देता है। इस दिन प्रातःकाल उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को पवित्र करना चाहिए। सूर्यदेव को अर्घ्य दें और अपने इष्टदेव का ध्यान करें। इस दिन वृक्षारोपण करना और गरीबों को दान देना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह नववर्ष आपके जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए, यही कामना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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