
दैनिक जीवन में शुभ-अशुभ का विचार भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। 10 दिसंबर 2025 को ग्रहों और नक्षत्रों की चाल आपके लिए क्या संकेत दे रही है? पौष कृष्ण पक्ष षष्ठी उपरांत सप्तमी तिथि पर क्या करें और क्या नहीं, जानने के लिए पढ़ें आज का संपूर्ण पंचांग। यह न केवल महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए सही समय बताता है, बल्कि आपके जीवन में संतुलन और शांति बनाए रखने में भी सहायक होता है।
क्या है पंचांग और इसकी महत्ता?
पंचांग, भारतीय ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो हमें दिन-प्रतिदिन के शुभ-अशुभ समय के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यह वैदिक ज्योतिष के पांच मुख्य अंगों – तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण – का समग्र विवरण होता है। प्रत्येक दिन इन पांचों अंगों की स्थिति बदलती रहती है, जिससे उस दिन का विशेष प्रभाव निर्धारित होता है। पंचांग का अध्ययन हमें ग्रहों की सटीक स्थिति से अवगत कराता है, जिससे हम अपने महत्वपूर्ण निर्णयों और कार्यों को अधिक सोच-समझकर निर्धारित कर पाते हैं।
10 दिसंबर 2025: तिथि और ग्रह स्थिति
10 दिसंबर 2025, बुधवार का दिन, पौष कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के साथ आरंभ होगा, जिसके उपरांत सप्तमी तिथि प्रभावी हो जाएगी। यह तिथि परिवर्तन दिन के विशिष्ट समय पर होगा, जो दैनिक गतिविधियों के लिए विशेष महत्व रखता है। पंचांग में चंद्रमा की स्थिति, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, साथ ही विभिन्न ग्रहों के गोचर का भी उल्लेख होता है। यह सभी जानकारियां एक साथ मिलकर हमें दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त, दिशाशूल और राहुकाल जैसी महत्वपूर्ण सूचनाएं देती हैं, ताकि हम किसी भी अनिष्ट से बच सकें और सफलता की दिशा में अग्रसर हो सकें।
शुभ-अशुभ समय का महत्व
पंचांग के माध्यम से प्राप्त शुभ-अशुभ समय की जानकारी हमें यह समझने में मदद करती है कि कौन से कार्य किस समय शुरू करने चाहिए। उदाहरण के लिए, किसी नए व्यवसाय की शुरुआत, गृह प्रवेश, विवाह या कोई अन्य मांगलिक कार्य शुभ मुहूर्त में करने से उसकी सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं, अशुभ समय या राहुकाल में ऐसे कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यह जानकारी व्यक्ति को अपने जीवन में अधिक संतुलन और सुख-शांति बनाए रखने में सहायता करती है, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मकता बनी रहे।








