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फ़रवरी, 21, 2026
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Holashtak 2026: होलाष्टक में इन नियमों का करें पालन, घर में आएगी सुख-समृद्धि…. पढ़िए क्या ना करें!

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Holashtak: फाल्गुन मास का आगमन धार्मिक उत्साह और रंगों के पर्व होली का संकेत देता है, परंतु होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक का आरंभ होता है, जो कि ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष सावधानी बरतने वाला काल माना गया है। इन आठ दिनों की अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना गया है। यह वह समय है जब प्रकृति और ग्रहों की ऊर्जा में विशेष परिवर्तन होता है, जिसका प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। ऐसी मान्यता है कि होलाष्टक के दिनों में शुभ ग्रहों की शक्तियाँ क्षीण हो जाती हैं और अशुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसके कारण किए गए कार्यों में विघ्न उत्पन्न होने की संभावना रहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Holashtak 2026: होलाष्टक में इन नियमों का करें पालन, घर में आएगी सुख-समृद्धि

Holashtak के दौरान क्यों रहते हैं शुभ कार्य वर्जित?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में ग्रह अपनी उग्र अवस्था में होते हैं। अतः गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्य इन दिनों में संपन्न नहीं किए जाते। यदि इन दिनों में कोई नया कार्य या शुभ अनुष्ठान किया जाए तो उसके परिणाम अशुभ या प्रतिकूल हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि होलाष्टक प्रारंभ होने से पूर्व ही घर के सभी महत्वपूर्ण कार्य, जैसे साफ-सफाई, मरम्मत, और अन्य आवश्यक तैयारियों को पूर्ण कर लिया जाए। इस अवधि में नए व्यापार का आरंभ, वाहन खरीदना, या कोई बड़ी संपत्ति का क्रय करना भी शुभ नहीं माना जाता।

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घर से नकारात्मक ऊर्जा को हटाने के लिए होलाष्टक से पहले ही कुछ विशेष चीजों को हटाना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता का संचार होता है और आने वाली होली का पर्व भी शुभता से भर जाता है। खंडित मूर्तियां, टूटे-फूटे बर्तन, पुराने कपड़े, अनावश्यक रद्दी, और घर में बंद पड़ी घड़ियां जैसी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। इन्हें होलाष्टक से पहले ही घर से बाहर कर देना चाहिए। इसके साथ ही, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया और स्नान-दान के शुभ नियम, पढ़िए होलिका दहन पर इसका प्रभाव!

होलाष्टक के दौरान किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय हैं, जो इस अवधि के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं। इन दिनों में भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विशेष फलदायी होता है। दान-पुण्य के कार्य भी इस अवधि में करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। यह समय ईश्वर भक्ति और आत्मचिंतन के लिए उत्तम माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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होलाष्टक एक ऐसा समय है जब हमें भौतिक सुखों की अपेक्षा आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। घर की साफ-सफाई और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी पवित्रता आती है। इन नियमों का पालन करके हम होलाष्टक के दौरान आने वाले किसी भी संभावित अशुभ प्रभाव से बच सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं। यह अवधि हमें आत्म-शुद्धि और आने वाले पर्व की तैयारी का अवसर प्रदान करती है।

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