

Holi 2026 Date: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पवित्र पर्व मनाया जाता है और इसके अगले दिन रंगों का महापर्व होली संपूर्ण देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में होली की तारीखों को लेकर कुछ भक्तों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसे आज हम विस्तृत पंचांग गणनाओं के आधार पर स्पष्ट करेंगे।
Holi 2026 Date: जानिए कब है होलिका दहन और रंगों वाली होली का शुभ मुहूर्त
Holi 2026 Date: होलिका दहन और रंगवाली होली कब है?
यह पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद की भक्ति को स्मरण करते हैं और होलिका को अग्नि में भस्म होते देख सभी नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रंगों का यह त्योहार जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है, जिसके अगले दिन चैत्र प्रतिपदा को रंगवाली होली खेली जाती है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में होलिका दहन और धुलेंडी की सही तिथियां क्या होंगी और इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
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होलिका दहन की शुभ तिथि और मुहूर्त
| पर्व | तिथि | दिन | मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| होलिका दहन | 15 मार्च 2026 | रविवार | शाम 06:26 से रात 08:52 तक |
| रंगवाली होली (धुलेंडी) | 16 मार्च 2026 | सोमवार | पूरा दिन |
होलिका दहन की पूजा विधि
- होलिका दहन के लिए खुली जगह का चुनाव करें और वहां लकड़ी, कंडे, उपले आदि एकत्रित कर लें।
- पूजा सामग्री में एक लोटा जल, रोली, चावल, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल और नारियल आदि शामिल करें।
- होलिका के चारों ओर कच्चा सूत सात बार लपेटें और फिर उसकी पूजा करें।
- भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद का स्मरण करते हुए अग्नि प्रज्ज्वलित करें।
- होलिका की अग्नि में जौ, गेहूं की बालियां, चना और गन्ना अर्पित करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- प्रदक्षिणा करें और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
होली का पौराणिक महत्व और कथा
होली का त्योहार हिरण्यकश्यप और उसके पुत्र प्रहलाद की कथा से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप एक अहंकारी राजा था जिसे भगवान विष्णु से घृणा थी, लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन सभी विफल रहे। अंत में उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं भस्म हो गई। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ प्रहलादाय नमः।
इस प्रकार, वर्ष 2026 में होलिका दहन 15 मार्च, रविवार को होगा, जबकि रंगों का त्योहार धुलेंडी 16 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा। यह पर्व प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशी का इजहार किया जाता है। होली के दिन भगवान कृष्ण को अबीर और गुलाल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। इस पावन अवसर पर अपने इष्टदेव का ध्यान करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।


