
Holi in Jharkhand: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर रंगों का महापर्व होली मनाया जाता है, जो देशभर में खुशियों और उत्साह का संचार करता है। विशेष रूप से, झारखंड की पावन भूमि पर होली का उत्सव केवल रंगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गहरी आस्था, प्राचीन परंपराओं और अनूठी संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
Holi in Jharkhand: परंपरा, संस्कृति और आस्था का अनुपम रंग
Holi in Jharkhand: झारखंड की अनूठी परंपराएं
फाल्गुन पूर्णिमा के आते ही प्रकृति भी रंगों से सराबोर होने लगती है। ऐसे में झारखंड के गांवों और कस्बों में होली का रंग अपने चरम पर होता है, जहां यह पर्व अत्यंत शालीनता और सदियों पुरानी **परंपरा** के साथ मनाया जाता है। यहां की होली सिर्फ गुलाल से नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों से रंगी होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
झारखंड की ग्रामीण संस्कृति में होली का विशेष स्थान है। यहां कई स्थानों पर होलिका दहन के बाद बची राख से होली खेलने की **परंपरा** है, जिसे ‘राख की होली’ कहते हैं। यह राख शुभ मानी जाती है और माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। इसके साथ ही, कई गावों में ‘डोल जतरा’ का आयोजन होता है, जिसमें भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों को डोली में रखकर भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए रंगों और गुलाल से होली खेलते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। यह दृश्य यहां की समृद्ध संस्कृति और लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है।
होलिका दहन की पूजा विधि
- होलिका दहन स्थल को गोबर और गंगाजल से शुद्ध करें।
- होलिका के चारों ओर सूत के धागे से तीन या सात परिक्रमा करें।
- अक्षत, पुष्प, रोली, गुलाल, बताशे, नए अनाज और नारियल होलिका को अर्पित करें।
- शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्वलित करें।
- अग्नि की परिक्रमा करते हुए अपनी मनोकामनाएं कहें।
- होलिका की अग्नि में जौ, गेहूं और चने की बालियां भूनना शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त (उदाहरण)
| तारीख | समय | विवरण |
|---|---|---|
| 24 मार्च 2025 | शाम 06:30 बजे से रात 08:50 बजे तक | होलिका दहन का शुभ मुहूर्त |
| 25 मार्च 2025 | सूर्योदय से | रंगों की होली (धुलेंडी) |
होली का मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
त्वं पूजिता सुरगणैः पितृभिचैव पूजिता।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं होलिका वरदा भव।।
झारखंड की यह अनूठी होली न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह एक जीवनशैली है, जो हमें प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता से जोड़ती है। यह हमें सिखाती है कि कैसे सादगी में भी गहरे अर्थ और आनंद को पाया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
**उपाय:** होली के दिन होलिका की अग्नि में सरसों के दाने अर्पित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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