

Holika Dahan 2026: प्रकृति के पाँच तत्व और हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू का समन्वय ज्योतिष और आध्यात्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। होलिका दहन, फाल्गुन पूर्णिमा की पावन संध्या पर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक, अग्नि की शुद्धता और पवित्रता का महापर्व है। इस शुभ अवसर पर अग्नि प्रज्वलित कर नकारात्मक ऊर्जा का नाश किया जाता है, परंतु इस पुनीत कार्य में कुछ विशेष वृक्षों की लकड़ियों का प्रयोग वर्जित माना गया है, जिनकी अनदेखी करने से दोष लग सकता है और पूजन का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
होलिका दहन 2026: जानिए किन पवित्र लकड़ियों को जलाना है वर्जित
होलिका दहन 2026: किन लकड़ियों का प्रयोग शुभ और किनका अशुभ
सनातन धर्म में होलिका दहन का विशेष महत्व है, जहाँ अग्नि को साक्षी मानकर सभी अनिष्टों को जलाया जाता है। इस पवित्र अग्नि में कुछ भी अर्पित करने से पहले, उसकी शुद्धता और धार्मिक मान्यताओं का विचार करना अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन में कुछ विशेष वृक्षों की लकड़ियों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इनमें आम, पीपल, बरगद, गूलर और शमी जैसे पवित्र और पूजनीय वृक्षों की लकड़ियाँ शामिल हैं। इन वृक्षों को देवताओं का वास माना जाता है और इन्हें काटना या इनकी लकड़ियों को जलाना अशुभ फलदायी हो सकता है। ऐसा करने से पितृ दोष, ग्रह दोष और अन्य प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसके विपरीत, होलिका दहन के लिए गोहरी (गाय के गोबर से बने उपले), अरंडी के पेड़ की लकड़ी, सूखे नारियल, और झाड़ियों की सूखी टहनियाँ शुभ मानी जाती हैं। इनका प्रयोग अग्नि को प्रज्वलित करने और वातावरण को शुद्ध करने में सहायक होता है। अग्नि पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में इसका विस्तृत उल्लेख मिलता है। यह माना जाता है कि इन लकड़ियों का दहन नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और घर में सुख-शांति लाता है।
होलिका दहन की पावन पूजा विधि
होलिका दहन से पूर्व, विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह पूजन आपके जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाता है।
- होलिका दहन से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- एक थाली में रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, गोबर के उपले की माला (बड़कुले), मिठाई और एक लोटा जल रखें।
- होलिका स्थल पर जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
- होलिका पर जल, रोली, अक्षत, फूल और अन्य सामग्री अर्पित करें।
- कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार लपेटें।
- अपने परिवार के सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करें।
- इसके बाद विधि-विधान से होलिका दहन करें।
- अग्नि प्रज्वलित होने के बाद, परिवार सहित उसकी सात परिक्रमा करें।
- गेहूं की बालियाँ और चने के दाने अग्नि में भूनना शुभ माना जाता है।
होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का पावन पर्व मनाया जाता है। 2026 में होलिका दहन के लिए संभावित शुभ मुहूर्त निम्न प्रकार से हो सकता है। सटीक और विस्तृत जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग का अवलोकन करें।
| पंचांग | तिथि | मुहूर्त समय |
|---|---|---|
| होलिका दहन 2026 | गुरुवार, 12 मार्च 2026 | सायं 06:30 बजे से रात्रि 08:50 बजे तक (संभावित) |
होलिका दहन का महत्व और कथा
होलिका दहन का पर्व भक्त प्रहलाद और भगवान विष्णु के प्रति उनकी अटल श्रद्धा की विजय का प्रतीक है। हिरण्यकश्यप नामक अहंकारी राजा का पुत्र होने के बावजूद प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि से अप्रभावित रहेगी। उसने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठे ताकि प्रहलाद जल जाए। परंतु, भगवान की कृपा से होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बाहर आ गए। यह कथा दर्शाती है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रबल क्यों न हो, अंततः सच्चाई और भक्ति की ही विजय होती है। इस दिन अग्नि में आहूति देकर हम अपने भीतर की बुराइयों और नकारात्मक विचारों का दहन करते हैं।
“अहं ब्रह्मास्मि”
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
निष्कर्षतः, होलिका दहन केवल लकड़ियों का जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, लोभ और द्वेष का त्याग है। यह पर्व हमें धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है। इस पावन अवसर पर आप सभी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें


