



Jail Yoga in Astrology: ज्योतिष शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है जो ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर मनुष्य के भविष्य का आकलन करता है। हमारे कर्मों और भाग्य का गहरा संबंध इन खगोलीय पिंडों से होता है। कई बार व्यक्ति अनजाने में या किसी विशेष परिस्थिति में ऐसे विवादों में फंस जाता है, जिसका परिणाम कारावास या कानूनी बंधन के रूप में सामने आता है। यह केवल परिस्थितियों का नहीं, बल्कि कुंडली में मौजूद कुछ विशेष ग्रह योगों का भी परिणाम होता है, जिन्हें ‘जेल योग’ कहा जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये योग व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी के चक्कर और गंभीर मामलों में कारावास तक पहुंचा सकते हैं।
कुंडली में ‘Jail Yoga in Astrology’ का रहस्य: ग्रहों की कौन सी चाल कराती है कारावास?
ज्योतिष के अनुसार, जब कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों जैसे शनि, मंगल, राहु और कभी-कभी केतु या सूर्य की स्थिति अशुभ होती है, तो यह कानूनी बंधन या कारावास का कारण बन सकती है। ये ग्रह अपने स्वभाव और स्थान के अनुरूप फल देते हैं।
Jail Yoga in Astrology: ग्रहों की अशुभ स्थितियाँ
शनि (Saturn): कर्मफल दाता शनि देव का संबंध न्याय और दण्ड से है। यदि शनि छठे, आठवें या बारहवें भाव में नीच का हो, वक्री हो, शत्रु राशि में हो, या पाप ग्रहों से दृष्ट हो, तो यह व्यक्ति को कानूनी पचड़ों में फंसा सकता है। विशेषकर शनि की महादशा या अंतर्दशा के दौरान ऐसे योग प्रबल हो जाते हैं। दशमेश का छठे या बारहवें भाव से संबंध भी कारावास का कारण बन सकता है।
मंगल (Mars): मंगल को क्रूर और युद्ध का कारक ग्रह माना जाता है। यदि मंगल छठे, आठवें, बारहवें भाव में पाप ग्रहों के साथ हो, या शनि-राहु जैसे ग्रहों से दृष्ट हो, तो यह व्यक्ति को हिंसक प्रवृत्ति या वाद-विवाद में फंसाकर जेल तक पहुंचा सकता है। भूमि विवाद या संपत्ति से जुड़े मामलों में मंगल की अशुभ स्थिति जेल का कारण बन सकती है।
राहु (Rahu): राहु एक मायावी और भ्रम फैलाने वाला ग्रह है। राहु का संबंध षड्यंत्र, धोखेबाजी और अचानक आने वाली परेशानियों से होता है। यदि राहु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, या दशमेश के साथ संबंध बनाए और अन्य पाप ग्रहों का प्रभाव हो, तो यह व्यक्ति को धोखाधड़ी, गैर-कानूनी गतिविधियों या झूठे आरोपों के कारण कारावास दिला सकता है। राहु की महादशा या अंतर्दशा में ऐसे ग्रह दोष विशेष रूप से प्रभावी होते हैं।
अन्य ग्रहों का प्रभाव:
कभी-कभी सूर्य की अशुभ स्थिति (जैसे नीच राशि में या पाप ग्रहों के साथ) सरकारी दंड या कारावास का संकेत देती है। द्वादश भाव (12वां घर) कारावास, खर्च और हानि का भाव होता है। यदि द्वादशेश पाप ग्रहों से युक्त होकर पीड़ित हो, या छठे, आठवें भाव से संबंध बनाए, तो यह भी ‘जेल योग’ का निर्माण करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। छठा भाव शत्रु, ऋण और मुकदमेबाजी का भाव है। इसका संबंध अष्टम (बाधा) या द्वादश (कारावास) भाव से होना भी अशुभ माना जाता है।
उपाय और मार्गदर्शन:
यदि आपकी कुंडली में ऐसे ‘Jail Yoga in Astrology’ की संभावना बनती दिख रही है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे योगों के प्रभाव को कम करने के लिए कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं:
- शनि शांति: शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि मंत्रों का जप करें और गरीबों को दान करें।
- मंगल शांति: मंगल के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की उपासना करें। मंगलवार का व्रत रखें और सुंदरकांड का पाठ करें।
- राहु शांति: राहु के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ करें, शिव जी की आराधना करें और गोमेद धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लें।
- कर्म सुधार: सबसे महत्वपूर्ण है अपने कर्मों में सुधार लाना। किसी भी प्रकार के अनैतिक या गैर-कानूनी कार्य से बचें। हमेशा सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें।
- नियमित पूजा: प्रतिदिन अपने इष्टदेव की आराधना करें। आध्यात्मिकता और ध्यान से मन को शांत रखें।
इन ज्योतिषीय उपायों और सद्कर्मों के माध्यम से व्यक्ति न केवल ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम कर सकता है, बल्कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित जीवन भी जी सकता है। याद रखें, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ज्योतिष केवल मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय हमेशा आपके कर्मों पर निर्भर करता है।
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