Jaya Ekadashi 2026: सनातन धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, और इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित जया एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत मोक्षदायिनी और अत्यंत फलदायी माना गया है, जो सभी पापों का नाश कर व्यक्ति को वैकुंठ धाम की प्राप्ति कराता है।
जया एकादशी 2026: व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि
जया एकादशी 2026: पूजा विधि और नियम
पुराणों में वर्णित माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना से समस्त कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु जी के अनुसार, इस दिन का व्रत रखने से व्यक्ति को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और उसे स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है। यह दिन कई शुभ योग के साथ आता है, जो इसके महत्व को और बढ़ा देता है। इस वर्ष, जया एकादशी व्रत 29 जनवरी, गुरुवार को रखा जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत अत्यंत पवित्र माना गया है और श्रद्धापूर्वक इसे करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय |
|---|---|
| जया एकादशी तिथि प्रारंभ | 28 जनवरी 2026, रात्रि 10:15 बजे |
| जया एकादशी तिथि समाप्त | 29 जनवरी 2026, रात्रि 08:30 बजे |
| व्रत पारण मुहूर्त | 30 जनवरी 2026, प्रातः 07:15 बजे से 09:15 बजे तक |
जया एकादशी व्रत की पूजा विधि
यह व्रत दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाता है, जब व्रती को सात्विक भोजन ग्रहण करना होता है। एकादशी के दिन की पूजा विधि निम्नलिखित है:
- एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को एक चौकी पर स्थापित करें।
- भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र अर्पित करें।
- उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) और तुलसी दल अर्पित करें।
- जया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।
- रात में जागरण करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- द्वादशी तिथि को प्रातः काल स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें और किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें।
- इसके बाद स्वयं पारण कर व्रत को पूर्ण करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भगवान विष्णु का मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
निष्कर्ष एवं उपाय
जया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को बैकुंठ की प्राप्ति होती है और वह जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करना भी कल्याणकारी होता है। इस व्रत को करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि मन को शांति और आत्मिक संतोष भी मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको ऐसे ही आध्यात्मिक ज्ञान से परिपूर्ण रखता है।

