

Jwalamukhi Yog 2026: भारतीय ज्योतिष में कुछ ऐसे योग होते हैं, जो अपने विशेष प्रभावों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये योग कभी शुभ फलदायी होते हैं, तो कभी कुछ विशेष कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं। ऐसे ही एक महत्वपूर्ण कालखंड के रूप में ज्वालामुखी योग का उल्लेख मिलता है, जो अपने तीव्र और अप्रत्याशित परिणामों के लिए जाना जाता है। फरवरी 2026 में ऐसा ही एक ज्वालामुखी योग निर्मित होने जा रहा है, जिसके विषय में विस्तृत जानकारी रखना प्रत्येक साधक और जिज्ञासु के लिए आवश्यक है।
फरवरी 2026 में Jwalamukhi Yog 2026: महत्व और वर्जित कार्य
फरवरी 2026 में एक ऐसा ही ज्योतिषीय अशुभ योग निर्मित होने जा रहा है, जिसे `ज्वालामुखी योग 2026` के नाम से जाना जाता है। यह योग अपने नाम के अनुरूप ही कुछ तीव्र और अप्रत्याशित परिणाम देने वाला माना गया है। यह अशुभ योग कुछ विशिष्ट तिथि, नक्षत्र और वार के संयोग से बनता है, और इसका निर्माण एक विशेष खगोलीय स्थिति को दर्शाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब तिथियों और नक्षत्रों का संयोग अग्नि तत्व को बढ़ाता है, तब इस योग का निर्माण होता है। इस दौरान कोई भी नया कार्य शुरू करना या महत्वपूर्ण निर्णय लेना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Jwalamukhi Yog 2026: जानें इसका समय और सावधानियां
प्रत्येक व्यक्ति को इस योग के समय और महत्व को समझना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की हानि से बचा जा सके। फरवरी 2026 में यह योग कब बनेगा, इसकी सटीक तिथि और समय ज्योतिषीय पंचांगों के माध्यम से ही ज्ञात होगा, किंतु इसका सामान्य प्रभाव और इससे जुड़ी सावधानियां सभी के लिए समान हैं। यह योग मुख्य रूप से उन कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिनकी शुरुआत में स्थिरता और शुभता की आवश्यकता होती है।
ज्वालामुखी योग का ज्योतिषीय महत्व
ज्वालामुखी योग को ज्योतिष में एक विनाशकारी योग माना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ “विस्फोट” या “विनाश” से जुड़ा है। यह योग तिथियों के बीच अग्नि तत्व की अधिकता के कारण बनता है। इस योग के दौरान किए गए किसी भी कार्य में विघ्न आने या उसके असफल होने की आशंका प्रबल रहती है। यह मुख्य रूप से उन कार्यों को प्रभावित करता है, जिनमें लंबे समय तक स्थिरता या शांति की आवश्यकता होती है। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार का शुभारंभ, यात्रा और भूमि-भवन से जुड़े कार्यों के लिए यह समय अत्यंत प्रतिकूल माना गया है।
ज्वालामुखी योग में वर्जित कार्य
ज्योतिषीय ग्रंथों में ज्वालामुखी योग के समय कुछ विशेष कार्यों को करने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है। इन कार्यों में शामिल हैं:
* **विवाह संस्कार:** इस योग में विवाह करना दांपत्य जीवन में अशांति और विघटन का कारण बन सकता है।
* **गृह प्रवेश:** नए घर में प्रवेश करना या नींव डालना अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह घर के सदस्यों के लिए अस्थिरता ला सकता है।
* **नया व्यापार या नौकरी का आरंभ:** इस समय किसी नए व्यापार की शुरुआत या नई नौकरी में प्रवेश करने से असफलता या बड़े नुकसान की संभावना रहती है।
* **यात्रा:** लंबी दूरी की यात्राएं, विशेषकर धार्मिक यात्राएं या महत्वपूर्ण व्यावसायिक यात्राएं, इस दौरान टाल देनी चाहिए।
* **भूमि-भवन संबंधी कार्य:** किसी भी प्रकार की संपत्ति की खरीद-बिक्री या निर्माण कार्य शुरू करना अशुभ फल दे सकता है।
* **शुभ संस्कार:** मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्य भी इस अवधि में नहीं करने चाहिए।
* **महत्वपूर्ण निर्णय:** जीवन से जुड़े किसी भी बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय को इस योग की अवधि में लेने से बचना चाहिए। यह आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उपाय और निष्कर्ष
ज्वालामुखी योग की अशुभता को कम करने के लिए ज्योतिषीय सलाह के अनुसार कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इस दौरान मन को शांत रखना, अनावश्यक वाद-विवाद से बचना, और आध्यात्मिकता की ओर ध्यान केंद्रित करना लाभकारी सिद्ध होता है। भगवान शिव की आराधना और महामृत्युंजय मंत्र का जप करना इस अवधि में विशेष रूप से प्रभावी माना गया है। संयम और धैर्य के साथ इस कालखंड को व्यतीत करना ही समझदारी है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिषीय योग हमें केवल संभावित चुनौतियों के प्रति आगाह करते हैं, ताकि हम सावधानी बरत सकें। फरवरी 2026 में आने वाला ज्वालामुखी योग हमें अपने कार्यों में और अधिक विचारशील होने की प्रेरणा देता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस जानकारी के साथ, आप फरवरी 2026 में आने वाले ज्वालामुखी योग के दौरान स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

