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मार्च, 28, 2026
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Kharmas 2025: क्यों नहीं होते खरमास में शुभ मांगलिक कार्य?

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Kharmas 2025: ज्योतिष शास्त्र में खरमास का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह वह अवधि है जब ग्रहों के राजा सूर्य, बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ ऊर्जा में कमी आती है और मांगलिक कार्यों के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं रह जातीं।

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# Kharmas 2025: क्यों नहीं होते खरमास में शुभ मांगलिक कार्य?

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## Kharmas 2025: खरमास में वर्जित हैं ये सभी कार्य

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ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब ग्रहों के अधिपति सूर्यदेव धनु राशि अथवा मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस पूरे माह को ‘खरमास’ या ‘मलमास’ के नाम से जाना जाता है। देवगुरु बृहस्पति की इन राशियों में सूर्य का प्रभाव कुछ क्षीण हो जाता है, जिससे शुभता और ऊर्जा में कमी आती है। यही कारण है कि इस अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह संस्कार, गृह प्रवेश, नवीन व्यापार का आरंभ, मुंडन संस्कार और उपनयन संस्कार जैसे शुभ अनुष्ठानों को रोक दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि खरमास के दौरान किए गए इन कार्यों में पूर्ण सफलता नहीं मिलती अथवा उनमें बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समय विशेष रूप से आत्मचिंतन, साधना और ईश्वर भक्ति के लिए उपयुक्त माना गया है। इस अवधि में दान-पुण्य, तीर्थ यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/

शास्त्रों में उल्लेख है कि खरमास में सूर्य नारायण का तेज कम होने से भूमि, भवन या वाहन क्रय जैसे बड़े मांगलिक कार्य भी टाल दिए जाते हैं। इन दिनों में किसी भी नए और महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार, भगवान सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाते हैं। निरंतर भ्रमण के कारण जब उनके घोड़े थक जाते हैं, तब वे खर यानी गधों को अपने रथ में जोतते हैं। गधे धीमे चलते हैं और इस कारण सूर्य की गति मंद पड़ जाती है, जिससे वे अपनी ऊर्जा पूरी तरह से पृथ्वी पर नहीं बिखेर पाते। इसलिए यह समय शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इस प्रकार, खरमास का समय भौतिक सुखों और लौकिक कार्यों के लिए भले ही अनुकूल न हो, किंतु यह आध्यात्मिक उन्नति और प्रभु स्मरण का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है। इस दौरान निष्ठापूर्वक किए गए जप, तप, दान और सेवा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगाजल से स्नान, श्री हरि विष्णु की आराधना और भागवत कथा का श्रवण विशेष फलदायी होता है।

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