
Lohri 2026: भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहारों का विशेष महत्व है, जो हमें प्रकृति और परमात्मा से जोड़ते हैं। लोहड़ी का पावन पर्व भी इन्हीं में से एक है, जो नववर्ष के आगमन और रबी की फसल के पकने का संदेश लेकर आता है। इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर उसमें विशेष आहुतियाँ दी जाती हैं, जिससे सुख-समृद्धि का आगमन होता है। परंतु, इस पवित्र अग्नि में कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिन्हें अर्पित करने से बचना चाहिए।
Lohri 2026: लोहड़ी की पावन अग्नि में न करें इन वस्तुओं का अर्पण, बनी रहेगी कृपा
यह पावन पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। Lohri 2026 के अवसर पर, भक्तजन अग्नि देव और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं। यह अग्नि नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और घर-परिवार में खुशहाली लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Lohri 2026: पवित्र अग्नि में क्या न डालें?
प्लास्टिक या कृत्रिम वस्तुएं: लोहड़ी की अग्नि पवित्रता का प्रतीक है। इसमें किसी भी प्रकार की प्लास्टिक, सिंथेटिक कपड़ा या अन्य कृत्रिम वस्तुएं डालना वर्जित है। यह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इसे अपवित्र भी माना जाता है।
- Advertisement -अपवित्र या जूठी वस्तुएं: अग्नि में सदैव शुद्ध और पवित्र वस्तुएं ही अर्पित करनी चाहिए। जूठी या किसी भी प्रकार से अपवित्र हुई वस्तुओं को अग्नि में डालने से देवी-देवता अप्रसन्न हो सकते हैं।
मांसाहारी या तामसिक वस्तुएं: लोहड़ी का पर्व सात्विक और धार्मिक होता है। इस दिन मांसाहारी भोजन या अन्य तामसिक वस्तुओं को अग्नि में डालना घोर अनिष्टकारी माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
कांटेदार पौधे या विषैले पदार्थ: अग्नि में कांटेदार पेड़-पौधों की टहनियां या कोई भी विषैला पदार्थ नहीं डालना चाहिए। यह शुभ नहीं माना जाता और घर में कलह का कारण बन सकता है।
लोहड़ी की पावन कथा और इसका महत्व
लोहड़ी का पर्व शीत ऋतु की विदाई और बसंत के आगमन का संकेत देता है। यह सूर्य के उत्तरायण होने से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है, जो मकर संक्रांति जैसे महापर्व के आगमन की सूचना देता है। यह किसानों के लिए नई फसल (रबी की फसल) की कटाई का उत्सव भी है। इस दिन अग्नि जलाकर उसमें तिल, मूंगफली, गजक, रेवड़ी और मक्का आदि अर्पित किए जाते हैं, जो प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है। दुल्ला भट्टी की लोक कथा भी इस पर्व से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने गरीब लड़कियों की मदद की थी। यह पर्व खुशियों, नृत्य और संगीत का संगम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लोहड़ी 2026 शुभ मुहूर्त
| विवरण | तिथि | समय |
|---|---|---|
| लोहड़ी 2026 | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | सूर्यास्त के बाद |
| लोहड़ी पूजन मुहूर्त | रात्रि 07:00 बजे से 08:30 बजे तक |
लोहड़ी पर इन मंत्रों से करें अग्नि देव की स्तुति
ॐ अग्नये नमः।
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ भूम्यै नमः।
निष्कर्ष और उपाय
लोहड़ी का पर्व केवल अग्नि जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सौहार्द और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। पवित्र अग्नि में सही वस्तुओं का अर्पण कर और वर्जित चीजों से बचकर आप इस पर्व का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। अग्नि की परिक्रमा करते हुए अपने मन में सभी बुराइयों को त्यागने का संकल्प लें और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करें। यह लोहड़ी आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए, यही कामना है।
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें






