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फ़रवरी, 16, 2026
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Lord Shiva: गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के अनुसार शिव का वास्तविक अर्थ

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Lord Shiva: इस ब्रह्मांड में शिव केवल एक नाम नहीं, अपितु एक गहन अनुभव हैं, एक शाश्वत सत्य जिसका साक्षात्कार ध्यान और आत्मचिंतन से संभव है।

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Lord Shiva: गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के अनुसार शिव का वास्तविक अर्थ

Lord Shiva: सत्य, चेतना और आनंद का दिव्य अनुभव

परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर, विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक, अक्सर अपने प्रवचनों में शिव के वास्तविक स्वरूप को उजागर करते हैं। वे बताते हैं कि शिव कोई पौराणिक व्यक्ति मात्र नहीं हैं, बल्कि यह स्वयं सत्य, चेतना और आनंद की वह पराकाष्ठा है, जिसे प्रत्येक मनुष्य अपने भीतर अनुभव कर सकता है। यह अनुभव न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन को एक नई दिशा भी देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गुरुदेव के अनुसार, शिव को जानने के लिए किसी बाहरी खोज की आवश्यकता नहीं, बल्कि हमें स्वयं में गहरे उतरना होगा।

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जब हम ध्यान की गहराइयों में उतरते हैं, तो हमें उस परम सत्य की झलक मिलती है, जिसे शिव कहा जाता है। यह दिव्य चेतना का अनुभव है, जहाँ मन की चंचलता शांत हो जाती है और व्यक्ति एक अद्भुत शांति से भर जाता है। शिव का अर्थ उस परम ऊर्जा से है जो संपूर्ण सृष्टि का आधार है, जो जन्म और मृत्यु के चक्र से परे है, और जो हर कण में व्याप्त है।

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यह भी पढ़ें:  महाशिवरात्रि 2026: शिव कृपा पाने के अचूक उपाय और महत्व

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर समझाते हैं कि शिवत्व को प्राप्त करने के लिए ध्यान सबसे शक्तिशाली माध्यम है। ध्यान के माध्यम से जब हम स्वयं को पूरी तरह से विश्राम देते हैं, तो मन की सभी परतें शांत हो जाती हैं और हमें अपने भीतर उस शाश्वत आनंद का बोध होता है, जो शिव का ही स्वरूप है। यह ‘तड़प’ या गहरी जिज्ञासा ही हमें सत्य की ओर ले जाती है, और अंततः हमें उस ‘विश्राम’ में समाहित कर देती है जहाँ केवल शिव ही शिव हैं। यह एक आंतरिक यात्रा है, जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह अनुभव हमें सिखाता है कि जीवन की हर परिस्थिति में भीतरी स्थिरता और आनंद को कैसे बनाए रखा जाए।

शिव का वास्तविक अर्थ सिर्फ धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला है, एक ऐसी अवस्था है जहाँ हम भय, चिंता और दुख से मुक्त हो जाते हैं। गुरुदेव के अनुसार, यह ‘दिव्य चेतना’ ही है जो हमें जीवन के हर पल में उपस्थित रहने और उसे पूरी तरह से जीने की प्रेरणा देती है। जो व्यक्ति इस आंतरिक शांति और आनंद को प्राप्त कर लेता है, वह वास्तव में शिवमय हो जाता है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि शिव का अनुभव हमें जीवन की छोटी-छोटी बातों में भी मिलता है – प्रकृति की सुंदरता में, एक शांत क्षण में, या किसी के प्रति निःस्वार्थ प्रेम में। यह सब उस विराट शिवत्व का ही अंश है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

उपाय और निष्कर्ष:

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के वचनों का सार यही है कि शिव को किसी मंदिर या मूर्ति में ढूंढने की बजाय, अपने भीतर की गहराई में अनुभव करें। नियमित ध्यान, सत्संग और सेवा के माध्यम से हम इस परम सत्य, चेतना और आनंद से जुड़ सकते हैं। यह अनुभव हमें जीवन में वास्तविक शांति, संतोष और उद्देश्य प्रदान करता है। शिव का मार्ग एक आंतरिक यात्रा है जो हमें स्वयं से जोड़ती है और हमें यह सिखाती है कि हम स्वयं ही शिव का स्वरूप हैं।

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