

Mahashivratri 2026: एक ऐसा पावन पर्व, जब देवों के देव महादेव और आदिशक्ति मां पार्वती का दिव्य मिलन होता है, और यह अवसर भक्तों को अलौकिक आनंद से भर देता है। इस महाशिवरात्रि पर, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री बैद्यनाथ धाम की महिमा का वर्णन करना अत्यंत शुभ है।
महाशिवरात्रि 2026: कामना लिंग श्री बैद्यनाथ धाम की अलौकिक गाथा
महाशिवरात्रि 2026 पर बैद्यनाथ धाम का विशेष महत्व
देवघर स्थित श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह पवित्र स्थल ‘कामना लिंग’ के रूप में विश्वविख्यात है, जहां शिव भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर शिव और शक्ति के शाश्वत मिलन का प्रतीक है, जो सृष्टि के संतुलन का आधार है। यहां की अनूठी परंपराएं और रावणेश्वर महादेव से जुड़ी पौराणिक कथाएं भक्तों को अटूट श्रद्धा और विश्वास से जोड़ती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रावण द्वारा भगवान शिव को लंका ले जाने के प्रयास में स्थापित यह ज्योतिर्लिंग, भक्तों के लिए मोक्ष और कल्याण का द्वार है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां एक भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं। इस पावन अवसर पर शिव मंत्रों का जाप और ध्यान विशेष फलदायी माना गया है।
यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्र वातावरण हर भक्त को आत्मिक शांति प्रदान करता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। श्री बैद्यनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का जीता-जागता स्वरूप है। यहां आने वाला हर व्यक्ति महादेव की कृपा से धन्य हो जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व हमें भगवान शिव की महिमा और उनके आशीर्वाद को स्मरण करने का अवसर देता है। श्री बैद्यनाथ धाम में महादेव के दर्शन और पूजन से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए आध्यात्मिक उत्थान का केंद्र बिंदु है, जहां हर प्रार्थना स्वीकार की जाती है और महादेव का अनंत आशीर्वाद बरसता है।




