



Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव और देवी पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है। यह वह विशेष रात्रि है जब भगवान शिव तांडव करते हैं और सृष्टि का नवनिर्माण होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए यह दिन वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम के लिए भी खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर शिव मंत्रों का जाप असीमित पुण्य फल प्रदान करता है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर किए गए मंत्र जाप का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसलिए महादेव के इन विशेष मंत्रों का उच्चारण करके आप अपनी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं और जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर सकते हैं। इस दिन विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
महाशिवरात्रि 2026: मंत्र जाप का महत्व और उसकी शक्ति
महाशिवरात्रि की पूजा विधि अत्यंत सरल और प्रभावी है। यहां कुछ मुख्य चरण दिए गए हैं:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी और गंगाजल से अभिषेक करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, अकवन के फूल, चंदन, रोली और चावल अर्पित करें।
- देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
- धूप और दीप प्रज्ज्वलित करें।
- महादेव के प्रिय मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और आरती उतारें।
- रात भर जागरण कर शिव महिमा का गुणगान करें।
महाशिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त (13 फरवरी 2026)
| पूजा का प्रहर | समय (भारतीय समयानुसार) |
|---|---|
| प्रथम प्रहर | 13 फरवरी, शाम 06:22 बजे से रात्रि 09:26 बजे तक |
| द्वितीय प्रहर | 13 फरवरी, रात्रि 09:26 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक |
| तृतीय प्रहर | 14 फरवरी, मध्यरात्रि 12:30 बजे से सुबह 03:34 बजे तक |
| चतुर्थ प्रहर | 14 फरवरी, सुबह 03:34 बजे से सुबह 06:38 बजे तक |
| पारण का समय | 14 फरवरी, सुबह 06:48 बजे से दोपहर 03:26 बजे तक |
| निशिता काल पूजा | 13 फरवरी, मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे तक (50 मिनट) |
महादेव के कुछ विशेष मंत्र जो महाशिवरात्रि पर अत्यधिक फलदायी होते हैं:
ॐ नमः शिवाय।
यह षडाक्षरी मंत्र भगवान शिव को समर्पित सबसे मूल और शक्तिशाली मंत्र है। इसका जाप करने से मन को शांति मिलती है और सभी पापों का नाश होता है।
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
यह मंत्र अकाल मृत्यु से रक्षा करता है, आरोग्य प्रदान करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिव गायत्री मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
यह मंत्र भगवान शिव का आशीर्वाद पाने, ज्ञान वृद्धि और आंतरिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावी है।
रुद्र गायत्री मंत्र:
ॐ सर्वेश्वराय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
यह मंत्र भगवान रुद्र को समर्पित है और संकटों से मुक्ति दिलाकर सभी प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है।
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व हमें भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है। इन विशेष मंत्रों का जाप और श्रद्धापूर्वक की गई पूजा आपके जीवन में सकारात्मकता लाएगी और सभी बाधाओं को दूर करेगी। इस दिन उपवास रखने और रात भर जागरण करने का भी विशेष महत्व है। भगवान शिव की आराधना से न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।
उपाय: महाशिवरात्रि के दिन शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें। “आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।” इस दिन रुद्राक्ष की माला से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दान-पुण्य करने से भी विशेष लाभ होता है।
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