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फ़रवरी, 13, 2026
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महाशिवरात्रि 2026: क्यों अर्पित करते हैं शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग?

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Mahashivratri 2026: देवाधिदेव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि, प्रत्येक भक्त के लिए असीम श्रद्धा और भक्ति का अवसर लेकर आता है। इस पावन दिन भगवान शिव को विभिन्न प्रकार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं, जिनमें बेलपत्र, धतूरा और भांग प्रमुख हैं। जहां अन्य देवी-देवताओं को सुकोमल पुष्प चढ़ाए जाते हैं, वहीं भोलेनाथ को ये विशेष सामग्रियां क्यों प्रिय हैं, इसका अपना एक गहरा धार्मिक महत्व है। आइए, इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए इन पवित्र वस्तुओं के अर्पण के पीछे छिपे गूढ़ रहस्यों को जानें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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महाशिवरात्रि 2026: क्यों अर्पित करते हैं शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग?

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को धतूरा, भांग और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जहां अन्य देवी-देवताओं की पूजा में सुकोमल फूल अर्पित किए जाते हैं, वहीं भगवान शिव को ये विशेष चीजें क्यों चढ़ाई जाती हैं? आइए जानते हैं इन सामग्रियों के अर्पण के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में।

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महाशिवरात्रि 2026 पर इन सामग्रियों का विशेष अर्पण

बेलपत्र का महत्व

बेलपत्र को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माना जाता है। त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का स्वरूप माने जाने वाले बेलपत्र के तीन पत्ते, भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, बेल के वृक्ष में स्वयं शिव-पार्वती का वास होता है। बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को भी शांत करने वाला माना जाता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

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धतूरे का महत्व

धतूरा, जिसे विष का प्रतीक भी माना जाता है, भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है क्योंकि उन्होंने हलाहल विष का पान कर सृष्टि की रक्षा की थी। धतूरा अर्पित करने का अर्थ है अपने अंदर के विष, यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को भगवान शिव को समर्पित कर देना। यह दर्शाता है कि भक्त अपने समस्त दुर्गुणों को त्यागकर शिवत्व को प्राप्त करना चाहता है। आयुर्वेद में भी धतूरे के औषधीय गुणों का वर्णन मिलता है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए।

भांग का महत्व

भांग को भगवान शिव से जोड़ा जाता है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष का पान करने के बाद भगवान शिव ने भांग का सेवन किया था जिससे उन्हें शीतलता मिली थी। भांग का सेवन भक्तों द्वारा प्रसाद के रूप में किया जाता है, जो उन्हें शारीरिक कष्टों से मुक्ति और मन की शांति प्रदान करने में सहायक होता है। हालांकि, इसका उपयोग भी अत्यंत संयम और धार्मिक भावना से ही करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह केवल शिव भक्ति का एक प्रतीक है।

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निष्कर्ष और उपाय

इस प्रकार, महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बेलपत्र, धतूरा और भांग का अर्पण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहन आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व छिपा है। यह सामग्री भगवान शिव के विषपान, उनके वैराग्य और कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाती है। इन पवित्र वस्तुओं को अर्पित करते समय भक्त को पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव से अपने समस्त दुर्गुणों को त्यागकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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