

महाशिवरात्रि: पावन महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, जब देवों के देव महादेव और आदिशक्ति मां पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है। यह दिन न केवल वैवाहिक सुख की कामना करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शांति चाहने वालों के लिए भी परम फलदायी होता है।
Mahashivratri 2026: महादेव और गौरी के मिलन का अलौकिक पर्व
हिंदू धर्म में Mahashivratri का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है। यह वह पावन रात्रि है जब ब्रह्मांड के दो प्रमुख ऊर्जा स्वरूप एक होकर संपूर्ण सृष्टि में प्रेम, सद्भाव और सृजन का संचार करते हैं। प्राचीन काल से ही, विशेषकर मिथिला क्षेत्र में, इस दिन का महत्व अविस्मरणीय रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां की कन्याएं महादेव जैसे आदर्श पति की कामना लिए गौरी पूजा करती हैं और सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करती हैं। यह पर्व दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है।
Mahashivratri 2026: मिथिला की अनुपम परंपरा और शिव-गौरी का महत्व
मिथिला की धरती पर, जहां संस्कृति और परंपराएं अपनी गहरी जड़ें जमाए हुए हैं, आठ वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद से ही लड़कियां गौरी पूजन में लीन हो जाती हैं। वे एक छोटी कटोरी में सुपारी पर सिंदूर लगाकर घर-घर यह प्रथा निभाती दिखती हैं। यह परंपरा महादेव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और आदर्श दांपत्य जीवन की प्रेरणा है। मिथिला में आज भी हर लड़की की यही चाहत होती है कि उसे महादेव की तरह पति मिले, जो शक्ति और प्रेम का प्रतीक हो। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और पारिवारिक सुख की एक गहरी सीख है। इस दिन की गई शिव पूजा अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर प्रदान करने वाली और विवाहितों के दांपत्य जीवन को मधुर बनाने वाली मानी जाती है।
महाशिवरात्रि का महत्व और पूजा विधि
महाशिवरात्रि का दिन आध्यात्मिक जागरण और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पूजन विधि:
- महाशिवरात्रि के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और गन्ने का रस चढ़ाएं।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, चंदन, अक्षत और रोली अर्पित करें।
- भगवान शिव को सफेद मिष्ठान, फल और पंचामृत का भोग लगाएं।
- धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें और महाशिवरात्रि व्रत कथा सुनें।
- आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का विशेष महत्व होता है।
- शिवजी के मंत्रों का जाप करें।
ॐ नमः शिवाय॥
दांपत्य सुख के लिए महादेव का पूजन
भगवान शिव और माता पार्वती का संबंध प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। दांपत्य जीवन में सुख और सामंजस्य स्थापित करने के लिए महादेव और मां पार्वती के विवाह का स्मरण करना और उनका पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है। जो युगल महादेव के विराट स्वरूप और मां पार्वती के दृढ़ संकल्प को समझते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से सुखमय होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाती है।
निष्कर्ष और उपाय:
महाशिवरात्रि का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में प्रेम, विश्वास और सहिष्णुता कितनी महत्वपूर्ण है। महादेव जैसे पति और मां पार्वती जैसी पत्नी की कामना के साथ, इस दिन की गई शिव पूजा और भक्ति सभी के जीवन में खुशहाली लाए। अविवाहित कन्याएं इस दिन विशेष रूप से गौरी शंकर का पूजन कर अपने लिए सुयोग्य वर की प्रार्थना कर सकती हैं।
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