
Makar Sankranti 2026: भारतीय संस्कृति में पर्वों का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक है मकर संक्रांति, जो सूर्य देव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। यह पर्व आध्यात्मिक चेतना और नव ऊर्जा का संचार करता है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
Makar Sankranti 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पुण्यकाल का विस्तृत विश्लेषण
Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘सूर्य गोचर’ के नाम से जाना जाता है। यह खगोलीय घटना मात्र नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संक्रमण है, जो प्रकृति और मानव जीवन दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन से सूर्य अपनी दक्षिणायन यात्रा समाप्त कर उत्तरायण होते हैं, जिसका अर्थ है देवताओं का दिन प्रारंभ होना। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का शमन होता है। उत्तरायण का प्रारंभ इसी सूर्य गोचर के साथ होता है, जो इसे और भी पवित्र बनाता है।
Makar Sankranti 2026: का महत्व और दान का पुण्यकाल
मकर संक्रांति 2026 की सही तिथि
पंचांग गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार, 15 जनवरी को मनाया जाएगा। यह वह दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान-पुण्य कई गुणा फल प्रदान करते हैं।
| विवरण | समय |
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| मकर संक्रांति तिथि | गुरुवार, 15 जनवरी 2026 |
| सूर्य का मकर में गोचर | 15 जनवरी 2026, प्रातः 02:40 बजे |
| पुण्यकाल | प्रातः 06:58 बजे से सायं 05:40 बजे तक |
| महापुण्यकाल | प्रातः 06:58 बजे से प्रातः 08:33 बजे तक |
मकर संक्रांति की पूजा विधि
• प्रातःकाल पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
• सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
• स्नान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• भगवान सूर्य के साथ भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें।
• तिल, गुड़, चावल, खिचड़ी, वस्त्र, कम्बल आदि का दान करें।
• ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
• संभव हो तो पितरों का तर्पण भी करें।
उत्तरायण का आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति का दिन उत्तरायण के प्रारंभ का प्रतीक है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने बाणों की शैया पर लेटे हुए भी अपने प्राण तब तक नहीं त्यागे जब तक सूर्य उत्तरायण नहीं हो गए। उन्हें इच्छा-मृत्यु का वरदान प्राप्त था, और उन्होंने शुभ उत्तरायण काल में ही शरीर त्यागना उचित समझा, ताकि उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके। यह घटना उत्तरायण के आध्यात्मिक महत्व को सिद्ध करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवधि को शुभ कार्यों, तपस्या और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
मकर संक्रांति के मंत्र
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा और मंत्र जाप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा।।
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।।
निष्कर्ष और उपाय-
मकर संक्रांति का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, दान और नई शुरुआत का संदेश है। इस दिन किए गए दान और धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उपाय: मकर संक्रांति के दिन काली उड़द की दाल की खिचड़ी, तिल और गुड़ का सेवन करना तथा इन्हें दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे शनि देव और सूर्य देव दोनों प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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