
Makar Sankranti 2026: सूर्यदेव के उत्तरायण होने का यह पावन पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है, जब प्रकृति में नवीन ऊर्जा का संचार होता है और समस्त सृष्टि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह दिन दान-पुण्य, पवित्र स्नान और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, जो जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य प्रदान करता है।
Makar Sankranti 2026: इस पावन पर्व पर इन नियमों का करें पालन, पाएं सूर्यदेव का आशीर्वाद
मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो यह काल मकर संक्रांति कहलाता है। यह पर्व मुख्यतः सूर्यदेव को समर्पित है और इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसा समय है जब व्यक्ति अपने कर्मों से जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, बशर्ते वह कुछ विशेष नियमों का पालन करे। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान दान का महत्व अद्वितीय बताया गया है, जो आत्मा की शुद्धि और पापों से मुक्ति प्रदान करता है।
Makar Sankranti 2026 पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
मकर संक्रांति का दिन जितना पुण्यकारी है, उतनी ही महत्वपूर्ण इस बात की जानकारी भी है कि इस दिन किन कार्यों से बचना चाहिए। कुछ ऐसी गलतियां हैं जो इस शुभ दिन पर की जाएं तो व्यक्ति को आर्थिक संकट और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों और धर्म गुरुओं का मत है कि इन बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है:
- तामसिक भोजन का सेवन न करें: मकर संक्रांति के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा जैसे तामसिक भोजनों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
- किसी का अपमान न करें: इस पावन दिन किसी भी व्यक्ति, विशेषकर बुजुर्गों, गरीबों या असहायों का अपमान न करें। ऐसा करना पुण्य फल को नष्ट कर सकता है।
- पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं: प्रकृति का सम्मान करें। इस दिन पेड़-पौधों को काटना या उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है।
- गरीबों और जरूरतमंदों को खाली हाथ न लौटाएं: यदि कोई भिक्षुक या जरूरतमंद आपके द्वार पर आए, तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपनी सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करें।
- सूर्यदेव को अर्घ्य बिना कुछ खाए न दें: सूर्यदेव को अर्घ्य देने से पहले कुछ भी खाना वर्जित माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- शाम के समय कुछ भी न खाएं: मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन करना या भारी चीजें खाना अशुभ माना जाता है। इस दिन शाम को हल्का फलाहार कर सकते हैं।
- घर में कलह-क्लेश न करें: घर में शांति और सद्भाव बनाए रखें। इस दिन किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या कलह-क्लेश से बचें।
- कपड़े धोना या बाल धोना: कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कपड़े धोना या बाल धोना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि, यह व्यक्तिगत आस्था पर अधिक निर्भर करता है।
मकर संक्रांति का महत्व और अनुष्ठान
मकर संक्रांति का पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू और तमिलनाडु में पोंगल के रूप में यह हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी होते हैं। यद्यपि पंचांग भेद से मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, परंतु सामान्यतः यह पर्व मध्यकाल में अधिक शुभ माना जाता है।
| पर्व का नाम | वर्ष | तिथि | पुण्य काल | महापुण्य काल |
|---|---|---|---|---|
| मकर संक्रांति | 2026 | 14 जनवरी | प्रातः 07:15 से दोपहर 12:30 | प्रातः 07:15 से प्रातः 09:00 |
मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ कार्य
इस पुण्य दिवस पर कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें करने से व्यक्ति को ग्रहों के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है:
- सूर्यदेव को अर्घ्य दें: प्रातः काल स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, अक्षत, रोली और लाल फूल मिलाकर “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- तिल और गुड़ का दान करें: इस दिन तिल और गुड़ का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके सेवन से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- खिचड़ी दान करें: मकर संक्रांति को कई स्थानों पर खिचड़ी पर्व भी कहते हैं। इस दिन खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना शुभ होता है।
- गाय को चारा खिलाएं: गौ माता की सेवा करना इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।
- भगवत गीता या रामचरितमानस का पाठ करें: आध्यात्मिक ग्रंथों का पाठ करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
मकर संक्रांति पर पवित्र मंत्र
सूर्यदेव को समर्पित यह दिन मंत्र जाप के लिए भी उत्तम है। निम्न मंत्र का जाप करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है:
ॐ घृणि सूर्याय नमः।
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।
यह मंत्र सूर्य के तेज और ऊर्जा को आह्वान करता है।
मकर संक्रांति का पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और सात्विकता को अपनाने का संदेश देता है। इन नियमों का पालन कर और शुभ कार्यों को करके आप भी इस महापर्व का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
मकर संक्रांति का यह पावन अवसर जीवन में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। इस दिन किए गए स्नान दान और पुण्य कर्मों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि यह भौतिक जीवन में भी सुख-समृद्धि लाता है। इन बातों का ध्यान रखने से आप सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं। यह पर्व हमें अपने कर्मों के प्रति सजग रहने और दूसरों के प्रति दया भाव रखने की प्रेरणा देता है।





