
Makar Sankranti 2026: आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह समय, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, संपूर्ण भारतवर्ष में नवचेतना का संचार करता है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह पुण्यकाल, दान-धर्म और स्नान के महापर्व के रूप में भी मनाया जाता है। परंतु वर्ष Makar Sankranti 2026 में एक अनूठी स्थिति निर्मित हो रही है, जब मकर संक्रांति का पावन दिन एकादशी व्रत के साथ संरेखित हो रहा है, जिससे भक्तों के मन में ‘खिचड़ी खाएं या रखें एकादशी व्रत’ का धर्म-संकट उत्पन्न हो गया है। शास्त्रों में ऐसी स्थिति का स्पष्ट उल्लेख है और इसके समाधान हेतु विशिष्ट नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करने से दोनों पर्वों का संपूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
# मकर संक्रांति 2026: जब एक साथ आए पुण्यकाल और एकादशी का व्रत
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब मकर संक्रांति का पावन पर्व और एकादशी का पवित्र व्रत एक ही तिथि पर पड़ते हैं, तब एकादशी के नियमों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह एक दुर्लभ संयोग है, और ऐसे में संयम, व्रत तथा विधिपूर्वक पूजा करने से ही मकर संक्रांति का संपूर्ण और श्रेष्ठ पुण्य फल प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समय आत्म-शुद्धि और परमात्मा से जुड़ने का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।
## Makar Sankranti 2026 के पुण्य अवसर पर ऐसे करें पूजन
इस विशेष संयोग में, भक्तों को जहां एक ओर सूर्य देव की उपासना और स्नान-दान का महत्व समझना होगा, वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत के कठोर नियमों का भी पालन करना होगा। यह केवल शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है।
### मकर संक्रांति और एकादशी का महत्व
* **मकर संक्रांति:** यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो उत्तरायण काल की शुरुआत का संकेत देता है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य देना, तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न और वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पितरों की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
* **एकादशी व्रत:** प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन अन्न का त्याग कर फलाहार या निर्जल व्रत रखा जाता है। भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और रात्रि जागरण से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
### धर्म-संकट और शास्त्र सम्मत समाधान
जब Makar Sankranti 2026 पर ये दोनों पर्व एक साथ आ रहे हैं, तो शास्त्र कहते हैं कि एकादशी व्रत के नियमों का पालन सर्वोपरि है। इसका अर्थ यह है कि इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा है, परंतु एकादशी के कारण इसका त्याग करना ही उचित होगा। दान-पुण्य और स्नान के कार्य यथावत किए जा सकते हैं।
### पूजन विधि
* सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
* स्नान के पश्चात् सूर्य देव को अर्घ्य दें।
* सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें।
* भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके समक्ष एकादशी व्रत का संकल्प लें।
* पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखें। तिल, गुड़ और खिचड़ी जैसी वस्तुएं स्वयं ग्रहण करने के बजाय दान करें।
* भगवान विष्णु की पूजा करें, उन्हें तुलसी पत्र और पीले पुष्प अर्पित करें।
* शाम को संध्या वंदन करें और एकादशी की कथा सुनें।
* अगले दिन (द्वादशी तिथि को) व्रत का पारण करें।
### शुभ मुहूर्त (सामान्य)
| पर्व | तिथि | मुहूर्त | महत्व |
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| मकर संक्रांति | 14 जनवरी 2026 | सुबह 07:15 से शाम 05:46 | स्नान, दान, सूर्य पूजा |
| महापुण्य काल | 14 जनवरी 2026 | सुबह 07:15 से सुबह 09:00 | विशेष दान और पुण्य संचय के लिए |
| एकादशी व्रत प्रारंभ | 13 जनवरी 2026 | रात्रि 08:30 | एकादशी तिथि का प्रारंभ |
| एकादशी व्रत पारण | 15 जनवरी 2026 | सुबह 07:15 से सुबह 09:15 | द्वादशी तिथि में व्रत खोलना |
**नोट:** विशिष्ट समय क्षेत्र के अनुसार शुभ मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
यह महत्वपूर्ण है कि आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पुण्य अवसर पर दान का महत्व बढ़ जाता है। आप तिल, गुड़, कंबल, अनाज, और वस्त्रों का दान कर सकते हैं।
### मंत्र
> ॐ घृणि सूर्याय नमः।
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> ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
इन मंत्रों का जाप करने से सूर्य देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है, और इस विशेष संयोग का संपूर्ण लाभ मिलता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
### निष्कर्ष और उपाय
Makar Sankranti 2026 पर आने वाला यह अद्भुत संयोग हमें धर्म और अध्यात्म के प्रति अपनी निष्ठा को और भी सुदृढ़ करने का अवसर देता है। एकादशी के नियमों का पालन करते हुए मकर संक्रांति के पुण्य स्नान-दान को करके हम न केवल अपने पापों से मुक्ति पा सकते हैं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और शांति भी प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन सत्य, अहिंसा और सात्विक जीवन का संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु और सूर्य देव दोनों की कृपा से जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।





