
Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह महापर्व आता है, जो प्रकृति और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है। इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का विधान है। विगत वर्ष, मकर संक्रांति 2026 को लेकर यह चर्चा सामने आई है कि क्या इस वर्ष खिचड़ी का सेवन और दान उचित रहेगा? आइए इस विषय पर ज्योतिषीय और धार्मिक पहलुओं से विस्तार से जानते हैं।
मकर संक्रांति 2026: क्या इस बार नहीं होगा खिचड़ी का दान और भोग?
मकर संक्रांति का पर्व, जिसे कहीं-कहीं खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। यह वह समय होता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों का आरंभ होता है। यह परिवर्तन नई ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता का संचार करता है। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना, तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मकर संक्रांति 2026 पर खिचड़ी का महत्व और परंपरा
मकर संक्रांति पर खिचड़ी का सेवन और दान एक सदियों पुरानी परंपरा है। चावल, दाल, हरी सब्जियों और मसालों से बनी यह खिचड़ी न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि इसके धार्मिक और आध्यात्मिक मायने भी गहरे हैं। चावल को चंद्रमा का, उड़द दाल को शनि का, हरी सब्जियों को बुध का और हल्दी को बृहस्पति का कारक माना जाता है। इन सभी के मेल से बनी खिचड़ी ग्रहों की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। ऐसे में यह कहना कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी नहीं खानी चाहिए, एक भ्रम मात्र प्रतीत होता है। सामान्यतः, जब तक कोई विशिष्ट ज्योतिषीय योग या ग्रह गोचर अत्यधिक प्रतिकूल न हो, तब तक सनातन परंपराओं में इस प्रकार के व्यापक बदलाव नहीं आते हैं।
मकर संक्रांति के दिन स्नान दान का विशेष महत्व है। पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने से सभी पापों का शमन होता है। इस दिन तिल, गुड़, वस्त्र, कंबल और विशेष रूप से खिचड़ी का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों को शांति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और दान के महत्व को समझने का अवसर देता है।
मकर संक्रांति का पौराणिक संदर्भ
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही गंगा भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं। यही कारण है कि इस दिन गंगा स्नान को मोक्षदायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, महाभारत काल में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपने प्राण त्यागे थे, ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। यह दिन देवताओं का दिन माना जाता है, जब सूर्य अपनी यात्रा बदलकर दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं।
ॐ घृणि सूर्याय नमः॥
निष्कर्षतः, मकर संक्रांति 2026 पर खिचड़ी का सेवन और दान न करने की बात केवल एक अफवाह है। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग लगाना और दान करना अत्यंत शुभकारी होता है। किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में योग्य विद्वानों और ज्योतिषियों से परामर्श लेना उचित होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पावन पर्व पर हमें पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ परंपराओं का पालन करना चाहिए, जिससे सूर्य देव की कृपा सदैव बनी रहे।
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