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मार्च, 6, 2026
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Makar Sankranti 2026: इस मकर संक्रांति और एकादशी के महासंयोग पर करें ये विशेष दान, मिलेगी अक्षय पुण्य की प्राप्ति

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Makar Sankranti 2026: पावन पर्वों की पुण्यदायिनी बेला में, जब प्रकृति भी नव चेतना का संचार करती है, इस वर्ष मकर संक्रांति का आगमन एक ऐसे विशेष योग के साथ हो रहा है, जो भक्तों के लिए असीम कल्याणकारी सिद्ध होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष मकर संक्रांति का पावन पर्व षटतिला एकादशी के पवित्र दिन के साथ एक अद्भुत संयोग बना रहा है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है। यह समय सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है। ऐसे में, इस शुभ अवसर पर किए गए दान-पुण्य से न केवल जीवन के कष्ट दूर होते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के द्वार भी खुलते हैं।

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Makar Sankranti 2026: इस मकर संक्रांति और एकादशी के महासंयोग पर करें ये विशेष दान, मिलेगी अक्षय पुण्य की प्राप्ति

Makar Sankranti 2026 के पुण्यकाल में दान का महत्व

सनातन धर्म में दान का अत्यंत महिमामंडन किया गया है, और जब यह दान किसी पवित्र पर्व या शुभ संयोग पर किया जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष, जब मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, तब स्नान-दान का महत्व और भी अधिक हो जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में कहा गया है कि इस विशेष दिन पर किए गए दान से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, और यह दिन देवताओं के दिन की शुरुआत भी मानी जाती है। ऐसे में दान-पुण्य के माध्यम से व्यक्ति अपने पितरों को भी संतुष्ट कर सकता है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर कर सकता है। पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ दीप्ति शर्मा के अनुसार, इस पवित्र संयोग पर श्रद्धापूर्वक दान करने से बिगड़े काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह पावन अवसर हमें परोपकार और सेवा भाव का संदेश देता है।

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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अद्भुत संयोग पर विशेष वस्तुओं का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है, जो न केवल लौकिक बल्कि पारलौकिक सुखों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

उपलब्ध शुभ दान सामग्री

इस पवित्र संयोग पर निम्नलिखित वस्तुओं का दान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है:

* **तिल:** काले और सफेद तिल दोनों का दान शुभ माना जाता है। तिल का दान शनि दोष को शांत करता है और आरोग्य प्रदान करता है।
* **गुड़:** गुड़ का दान करने से सूर्य और गुरु ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे जीवन में मान-सम्मान और धन की वृद्धि होती है।
* **कंबल और ऊनी वस्त्र:** ठंड के मौसम में गरीबों और जरूरतमंदों को गर्म कपड़े दान करने से राहु और केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
* **खिचड़ी:** चावल, दाल और सब्जियों से बनी खिचड़ी का दान करने से ग्रह शांति होती है और जीवन में स्थिरता आती है। इसे अन्न दान का प्रतीक माना जाता है।
* **घी:** घी का दान करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहता है। यह गुरु और शुक्र ग्रह को प्रसन्न करता है।
* **नमक:** नमक का दान नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सुख-शांति लाता है।
* **फल और अनाज:** मौसमी फल और विभिन्न प्रकार के अनाज (जैसे चावल, गेहूं) का दान करने से घर में अन्नपूर्णा का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है।
* **गौ दान:** यदि संभव हो, तो गौ दान या गौ सेवा से भी अतुलनीय पुण्य मिलता है। यह सभी पापों का नाश कर मोक्ष प्रदान करता है।

दान के लिए शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति और एकादशी के इस महासंयोग पर दान करने के लिए निम्नलिखित मुहूर्त विशेष रूप से शुभ माने गए हैं:

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| शुभ मुहूर्त | तिथि एवं वार | आरंभ | समाप्ति |
| :———- | :———- | :— | :—— |
| **मकर संक्रांति पुण्यकाल** | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | प्रातः 07:15 बजे | सायं 05:46 बजे |
| **मकर संक्रांति महापुण्यकाल** | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | प्रातः 07:15 बजे | प्रातः 09:00 बजे |

इन मुहूर्तों में स्नान और दान करने से ग्रह-नक्षत्रों का अनुकूल प्रभाव प्राप्त होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

दान का आध्यात्मिक महत्व और मंत्र

दान केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्रिया है जो आत्मा को शुद्ध करती है और कर्मों को श्रेष्ठ बनाती है। यह अहंकार का त्याग और परोपकार की भावना का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दान से ग्रहों के अशुभ प्रभावों को भी शांत किया जा सकता है। मकर संक्रांति और एकादशी के दिन किया गया दान अनंत फलदायी होता है। दान करते समय मन में किसी प्रकार का छल या कपट नहीं होना चाहिए। निष्ठापूर्वक और श्रद्धा से किया गया दान ही सच्चा फल देता है।

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दान करते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है:

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्विकं स्मृतम्॥

यह मंत्र दान की सात्विक प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें दाता बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के, उचित समय, स्थान और पात्र को दान देता है।

निष्कर्ष एवं उपाय

मकर संक्रांति और एकादशी का यह पावन संयोग आध्यात्मिक उत्थान और पुण्य संचय का अनुपम अवसर प्रदान करता है। इस दिन सच्चे मन से किया गया स्नान-दान हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है और सभी प्रकार के कष्टों का निवारण करता है। इस शुभ अवसर पर सूर्य देव को अर्घ्य दें, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें, और यथाशक्ति दान करें। गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना सबसे बड़ा पुण्य है। गौशाला में चारा दान करना या पक्षियों को दाना खिलाना भी अत्यंत शुभ फल देता है। इन सरल उपायों से आप इस दिव्य संयोग का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।

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