नई दिल्ली: हिन्दू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे अगहन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इसका हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा 15 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और दान-पुण्य करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक उपाय जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।
बत्तीसी पूर्णिमा से संबंध
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का एक और विशेष संबंध बत्तीसी पूर्णिमा से भी है। बत्तीसी पूर्णिमा वर्ष में उन तीन पूर्णिमाओं को कहा जाता है जब पूर्णिमा तिथि का मान 32 घंटे या उससे अधिक होता है। ऐसा माना जाता है कि बत्तीसी पूर्णिमा के दौरान किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फलदायी होते हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बत्तीसी पूर्णिमा के साथ पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस विशेष संयोग में पूजा-पाठ और दान-धर्म करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक महत्व और उपाय
- भगवान शिव की पूजा: मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद आदि अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।
- माता पार्वती की आराधना: इस दिन माता पार्वती की पूजा करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
- दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
- व्रत: इस दिन व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और सभी पापों का नाश होता है।
- चंद्रमा की पूजा: पूर्णिमा तिथि चंद्रमा की होती है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र दोष समाप्त होता है और मानसिक शांति मिलती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विधान है। यदि यह संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र स्नान और दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।




