नई दिल्ली: आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा का शुभ अवसर है, जिसे साल की अंतिम पूर्णिमा के रूप में मनाया जा रहा है। हालांकि, इस शुभ दिन पर भद्रा का साया भी है, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भद्रा के स्वर्ग लोक में स्थित होने के कारण इसका नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा। ऐसे में, भक्त आज पूरे दिन बिना किसी बाधा के पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य संपन्न कर सकते हैं।
शुभ मुहूर्त और भद्रा का प्रभाव
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और पूजन आज पूरे दिन किया जा सकता है। भद्रा का वास स्वर्ग लोक में होने से इसका प्रभाव पृथ्वी पर शून्य रहेगा, जिससे पूजा-अर्चना में कोई रुकावट नहीं आएगी। यह साल की आखिरी पूर्णिमा होने के कारण इसका विशेष महत्व है, और इस दिन किए गए शुभ कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है।
साल की अंतिम पूर्णिमा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस मास की पूर्णिमा को ‘वैकुंठ चतुर्दशी’ के नाम से भी जाना जाता है और इसका विशेष पुण्यफल होता है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: [तिथि बताएं]
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: [तिथि बताएं]
- भद्रा का समय: [समय बताएं]
इस पावन अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं और संध्या काल में सत्यनारायण की कथा का श्रवण करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, और श्रद्धालु भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एकत्र होते हैं।



