

Narasimha Dwadashi 2026: भगवान नरसिंह को समर्पित नरसिंह द्वादशी का पावन पर्व सनातन धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र किंतु भक्तवत्सल रूप नरसिंह की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, जो अपने भक्तों की रक्षा हेतु अवतार लेकर प्रकट हुए थे।
# नरसिंह द्वादशी 2026: तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त
## नरसिंह द्वादशी 2026 का धार्मिक महत्व
भगवान विष्णु के चौथे अवतार, नरसिंह भगवान को समर्पित यह द्वादशी तिथि विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह तिथि भगवान नरसिंह के प्रकटोत्सव से जुड़ी है, जब उन्होंने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए हिरण्यकश्यप का वध किया था। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को भय और संकटों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व भक्त और भगवान के अटूट रिश्ते का प्रतीक है, जो हमें धर्म और आस्था की शक्ति का स्मरण कराता है। इस विशेष दिन पर भगवान के श्री चरणों में अपने को समर्पित कर भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
## नरसिंह द्वादशी व्रत की विधि
नरसिंह द्वादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को इन नियमों का पालन करना चाहिए:
* व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
* भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
* उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं, रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
* भगवान को फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं।
* भगवान नरसिंह के मंत्रों का जाप करें और नरसिंह चालीसा का पाठ करें।
* इस दिन सात्विक भोजन करें या निराहार रहें।
* अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण कर व्रत संपन्न करें।
## शुभ मुहूर्त और पारण का समय
वर्ष 2026 में नरसिंह द्वादशी का पावन पर्व 28 फरवरी, शनिवार को मनाया जाएगा।
(कृपया ध्यान दें: नीचे दी गई तिथियां और समय सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। सटीक मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।)
| विवरण | तिथि/समय (2026) |
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| द्वादशी तिथि आरंभ | 27 फरवरी, शुक्रवार, रात 10:20 बजे |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 28 फरवरी, शनिवार, रात 11:45 बजे |
| व्रत का दिन | 28 फरवरी, शनिवार |
| पारण मुहूर्त | 01 मार्च, रविवार, प्रातः 07:00 बजे से 09:30 बजे तक |
## नरसिंह कथा का सार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का अवतार लिया था। प्रहलाद के पिता, दैत्यराज हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि उसे न कोई मनुष्य मार सकता है, न कोई पशु; न दिन में, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर; न अस्त्र से, न शस्त्र से। अपने इस वरदान के अहंकार में चूर हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानने लगा और भगवान विष्णु की पूजा करने वाले सभी लोगों को दंडित करने लगा। जब उसका पुत्र प्रहलाद भी भगवान विष्णु का भक्त बन गया, तो हिरण्यकश्यप ने उसे अनेक यातनाएं दीं। अंततः, भगवान विष्णु खंभे को चीरकर आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में नरसिंह अवतार लेकर प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को गोधूलि बेला में (न दिन, न रात), घर की देहरी पर (न अंदर, न बाहर), अपनी जंघाओं पर लिटाकर (न जमीन पर, न आकाश में) अपने नाखूनों (न अस्त्र, न शस्त्र) से उसका वध कर दिया।
> ॐ नृम नृम नृम नरसिंहाय नमः।
> ॐ श्री नरसिंहाय नमः।
> ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
> नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। भगवान नरसिंह की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पवित्र दिवस पर सच्चे मन से की गई आराधना निश्चित रूप से मनोकामनाएं पूर्ण करती है और हमें आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।

