
Papmochani Ekadashi 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
पापमोचिनी एकादशी 2026: जानें व्रत की तिथि, पूजा विधि और महत्व
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, और चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पापमोचिनी एकादशी 2026 तो नाम से ही अपने महत्व को चरितार्थ करती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने तथा उनकी आराधना करने से व्यक्ति जाने-अनजाने में किए गए समस्त पापों से मुक्ति प्राप्त करता है। इस पुण्यतिथि पर विधिवत पूजा विधि का पालन करने से न केवल पापों का शमन होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और शांति भी आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
पापमोचिनी एकादशी 2026 का धार्मिक महत्व और पुण्य लाभ
ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को हजारों गायों के दान जितना पुण्य प्राप्त होता है। यह एकादशी मोह-माया से उत्पन्न हुए पापों का नाश करने वाली कही गई है। जो भक्त इस दिन निर्जल या फलाहार व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पापमोचिनी एकादशी व्रत की तिथि और पारण का समय
वर्ष 2026 में पापमोचिनी एकादशी का व्रत रविवार, 15 मार्च को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी सोमवार, 16 मार्च को किया जाएगा।
| तिथि | समय |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 14 मार्च 2026, शाम 07:10 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 15 मार्च 2026, शाम 06:40 बजे |
| पारण का समय (द्वादशी) | 16 मार्च 2026, सुबह 06:30 बजे से सुबह 08:50 बजे तक |
पापमोचिनी एकादशी की पूजा विधि
पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी होती है। यहाँ इस व्रत की सरल पूजा विधि दी गई है:
* एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
* पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें।
* एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
* आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।
* अगले दिन (द्वादशी) शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
पापमोचिनी एकादशी का पौराणिक महत्व
स्कंद पुराण में पापमोचिनी एकादशी के महत्व का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह कथा महर्षि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा से संबंधित है। महर्षि मेधावी जो तपस्या में लीन थे, मंजुघोषा के रूप-सौंदर्य पर मोहित हो गए और अपनी तपस्या भंग कर बैठे। कई वर्षों बाद जब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उन्होंने भगवान शिव की शरण ली। शिवजी के मार्गदर्शन से उन्होंने पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिली। यह कथा दर्शाती है कि सच्चे हृदय से किए गए प्रायश्चित और एकादशी व्रत से बड़े से बड़े पापों का भी नाश संभव है।
भगवान विष्णु का मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
व्रत का समापन और उपाय
पापमोचिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। व्रत के दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा अवश्य करें। व्रत के पारण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना और यथाशक्ति दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


