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मार्च, 14, 2026
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पापमोचनी एकादशी 2026: व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि

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Papmochani Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, यह भगवान विष्णु को समर्पित पुण्यदायिनी तिथि है जो पापों का शमन कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

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पापमोचनी एकादशी 2026: व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि

कब है पापमोचनी एकादशी 2026 और इसका धार्मिक महत्व

पापमोचनी एकादशी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है, इसलिए भक्तजन इसे पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाते हैं। इस वर्ष, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पवित्र तिथि 15 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से व्यक्ति के समस्त जन्मों के पापों का नाश होता है और उसे परलोक में उत्तम स्थान प्राप्त होता है। यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता है। शास्त्रों में इस एकादशी के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। जो भक्त इस दिन नियमपूर्वक व्रत करते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

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पापमोचनी एकादशी की पौराणिक व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी की कथा अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद है। प्राचीन काल में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि वन में तपस्या कर रहे थे। इंद्रलोक की एक सुंदर अप्सरा मंजुघोषा उनके तप को भंग करने के लिए आई। मंजुघोषा के रूप और सौंदर्य पर मोहित होकर मेधावी ऋषि अपनी तपस्या भूल गए और उसके साथ कई वर्षों तक रमे रहे। जब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उन्होंने मंजुघोषा को त्याग दिया और क्रोधवश उसे पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया। मंजुघोषा ने ऋषि से क्षमा याचना की और श्राप मुक्ति का उपाय पूछा।

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मेधावी ऋषि ने भी स्वयं को पाप का भागी मानते हुए, अपने पिता च्यवन ऋषि से प्रायश्चित का उपाय पूछा। च्यवन ऋषि ने उन्हें पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। मेधावी ऋषि और मंजुघोषा दोनों ने श्रद्धापूर्वक पापमोचनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा पिशाचिनी योनि से मुक्त होकर पुनः अपने सुंदर स्वरूप को प्राप्त हुई और स्वर्गलोक चली गई। वहीं, मेधावी ऋषि भी पाप मुक्त होकर अपनी तपस्या में लीन हो गए। यह कथा दर्शाती है कि सच्चे मन से किया गया प्रायश्चित और एकादशी व्रत कितना शक्तिशाली होता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
  • दिन भर निराहार रहें या फलाहार करें। अनाज का सेवन वर्जित है।
  • रात्रि में जागरण करें और भगवान विष्णु के भजनों का कीर्तन करें।
  • अगले दिन यानी द्वादशी को व्रत का पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें।
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शुभ मुहूर्त और पारण का समय

तिथिसमय
एकादशी तिथि प्रारंभ14 मार्च 2026, शाम 07:12 बजे
एकादशी तिथि समाप्त15 मार्च 2026, शाम 06:17 बजे
व्रत का दिन15 मार्च 2026
पारण का समय16 मार्च 2026, सुबह 06:33 से 08:50 बजे तक

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि उसे मोक्ष और आध्यात्मिक शांति भी मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से की गई आराधना सभी कष्टों को हर लेती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत मनुष्य को उसके पापों से मुक्ति दिलाकर एक शुद्ध और पवित्र जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है। इस एकादशी महत्व को समझते हुए, व्रत के दिन दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पवित्र तिथि पर अपनी सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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