back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 18, 2026
spot_img

Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी व्रत के नियम और सावधानियां

spot_img
- Advertisement -

Papmochani Ekadashi: परम पावन पापमोचनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्यदायी पर्व है। शास्त्रों में इस एकादशी के विशेष धार्मिक महत्व का वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार विधि-पूर्वक व्रत करने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत मनोकामना पूर्ति और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

- Advertisement -

Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी व्रत के नियम और सावधानियां

Papmochani Ekadashi: व्रत के नियम और सावधानियां

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है और फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है – ‘पाप’ अर्थात् दुष्कर्म और ‘मोचनी’ अर्थात् मुक्ति दिलाने वाली। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से न केवल व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी सुगम होता है। इस व्रत का पालन करते समय कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके।

- Advertisement -

पापमोचनी एकादशी 2026: पूजा विधि

पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रसन्नता और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:

- Advertisement -
  • व्रत के एक दिन पहले दशमी तिथि को सूर्यास्त से पूर्व भोजन कर लें और सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
  • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
  • रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) अर्पित करें। तुलसी दल चढ़ाना अनिवार्य है।
  • एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • दिनभर निराहार या फलाहार रहकर भगवान का स्मरण करें।
  • द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं पारण करें।
यह भी पढ़ें:  चैत्र नवरात्रि 2026: इन शुभ रंगों में करें माँ दुर्गा का पूजन, मिलेगा अखंड सौभाग्य

पापमोचनी एकादशी के दिन वर्जित कार्य

यद्यपि पापमोचनी एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है, फिर भी इस दिन अनजाने में भी कुछ ऐसी गलतियां नहीं करनी चाहिए, जो व्रत के प्रभाव को कम कर सकती हैं या उसे भंग कर सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन सावधानियों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • अन्न का सेवन: एकादशी के दिन किसी भी प्रकार के अन्न (गेहूं, चावल, दालें आदि) का सेवन पूर्णतः वर्जित है। व्रतधारी केवल फलाहार कर सकते हैं।
  • तामसिक भोजन: प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कलह और क्रोध: इस दिन किसी से भी वाद-विवाद, झगड़ा या क्रोध नहीं करना चाहिए। मन को शांत और पवित्र रखना चाहिए।
  • निंदा और झूठ: किसी की निंदा करना, अपशब्द बोलना या झूठ बोलना व्रत के नियमों के विरुद्ध है।
  • नशे का सेवन: किसी भी प्रकार के नशे (तंबाकू, शराब आदि) का सेवन कदापि न करें।
  • दिन में सोना: एकादशी के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। रात में जागरण कर भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।
  • बाल काटना/नाखून काटना: इस दिन बाल कटवाना या नाखून काटना भी वर्जित माना जाता है।
  • शरीर पर तेल लगाना: एकादशी के दिन शरीर पर तेल लगाना भी अशुभ माना जाता है।
  • स्त्री संग: ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
यह भी पढ़ें:  आज का पंचांग: 18 मार्च 2026 को जानें दिन-मान और अमावस्या तिथि का महत्व

पापमोचनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

पापमोचनी एकादशी का व्रत वर्ष 2026 में 24 मार्च, मंगलवार को रखा जाएगा। व्रत पारण 25 मार्च को किया जाएगा।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च 2026, सोमवार, सायं 06:15 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 24 मार्च 2026, मंगलवार, सायं 07:40 बजे तक
  • पारण का समय: 25 मार्च 2026, बुधवार, प्रातः 06:20 बजे से प्रातः 08:45 बजे तक।

(नोट: ये मुहूर्त पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं।)

पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद ने भगवान ब्रह्मा से पापमोचनी एकादशी के महात्म्य के बारे में पूछा था। तब ब्रह्मा जी ने बताया कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी आती है। इस व्रत को लेकर चित्ररथ नाम के एक राजा की पुत्री मंजुघोषा और मेधावी ऋषि की कथा प्रचलित है। मंजुघोषा ने मेधावी ऋषि को अपने रूप-जाल में फंसा लिया था, जिससे ऋषि ने अपना तप भंग कर दिया। जब ऋषि को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का श्राप दिया। मंजुघोषा ने श्राप मुक्ति का उपाय पूछा, तब ऋषि ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा पापों से मुक्त होकर अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त हुई।

यह भी पढ़ें:  चैत्र नवरात्रि 2026: महिषासुर वध की अविस्मरणीय गाथा और पर्व का महत्व

श्री हरि विष्णु मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

शांति के लिए, ‘‘विष्णवे नम:’’ मंत्र का जाप करें।

निष्कर्ष और उपाय

पापमोचनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी है और इसे श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट होते हैं। यह आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है। व्रत के दिन भगवान विष्णु को पीले पुष्प, पीले वस्त्र और पीली मिठाई अर्पित करें। तुलसी जी की पूजा करें और संध्याकाल में दीपदान अवश्य करें। यह आपके घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Nora Fatehi News: ‘सरके चुनर’ गाने पर मचे बवाल के बाद नोरा फतेही ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं ‘हिंदी लिरिक्स से थी अंजान’!

Nora Fatehi News: बॉलीवुड की दिलकश अदाकारा नोरा फतेही इन दिनों एक बड़े विवाद...

धुरंधर 2 पर Film Piracy का साया: जानें क्या है कानून और कितना जुर्माना!

Film Piracy: Film Piracy एक ऐसा खतरा है जो फिल्म उद्योग को लगातार नुकसान...

दिल्ली में बेकाबू हुए Dry Fruit Prices: पश्चिमी एशिया संकट का सीधा असर

Dry Fruit Prices: वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर अब देश...

जल्द आ रही है Triumph Speed T4, रॉयल एनफील्ड हंटर को देगी कड़ी टक्कर

Triumph Speed T4: भारतीय मोटरसाइकिल बाजार में जल्द ही एक नया खिलाड़ी दस्तक देने...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें