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मार्च, 14, 2026
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पापमोचिनी एकादशी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के लाभ

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Papmochani Ekadashi: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है, जो भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान करती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचिनी एकादशी अपने नाम के अनुरूप सभी ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन करने वाली मानी जाती है।

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पापमोचिनी एकादशी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के लाभ

सनातन परंपरा में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, पापमोचिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों से मुक्ति दिलाता है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करता है और उसे परमात्मा के करीब लाता है। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है।

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पापमोचिनी एकादशी का महत्व और व्रत नियम

पापमोचिनी एकादशी का अर्थ है ‘पापों का नाश करने वाली एकादशी’। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस एकादशी के प्रभाव से गंभीर से गंभीर पापों का भी शमन हो जाता है। भगवान कृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी। इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने वाला व्यक्ति समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है। यह व्रत केवल पापों को मिटाने वाला ही नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर धार्मिकता और नैतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है। व्रत नियम पालन करने से मन में सात्विकता आती है।

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**पापमोचिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त**

यह रही पापमोचिनी एकादशी 2026 से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियाँ और शुभ मुहूर्त:

| तिथि / विवरण | समय |
| :—————- | :———————————- |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 24 मार्च 2026, मंगलवार शाम 04:30 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 25 मार्च 2026, बुधवार शाम 05:40 बजे |
| पारण का समय | 26 मार्च 2026, गुरुवार प्रातः 06:19 बजे से प्रातः 08:43 बजे तक |

**पापमोचिनी एकादशी 2026: पूजा विधि**

पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इन चरणों का पालन करें:

* एकादशी के एक दिन पूर्व (दशमी) सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
* एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
* पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* भगवान को गंगाजल, चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) और तुलसी दल अर्पित करें।
* विष्णु सहस्रनाम या किसी अन्य विष्णु स्तोत्र का पाठ करें।
* गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* रात्रि में जागरण कर भगवान का भजन-कीर्तन करें।
* द्वादशी तिथि पर पारण मुहूर्त के भीतर व्रत खोलें।

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**पापमोचिनी एकादशी की पौराणिक कथा**

पौराणिक कथा के अनुसार, अप्सरा मंजुघोषा और मेधावी ऋषि के प्रसंग में ऋषि ने अपनी तपस्या भंग होने के कारण मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया था। मंजुघोषा के बार-बार अनुनय-विनय करने पर ऋषि मेधावी ने उसे पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा अपने पापों से मुक्त हुई और उसे श्राप से मुक्ति मिली। इसी प्रकार, चित्ररथ नामक राजा के उद्यान में भी यह कथा प्रचलित है, जहाँ पापमोचिनी एकादशी के प्रभाव से पापियों को मुक्ति मिली। यह कथा दर्शाती है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत कितने भी बड़े पापों का शमन करने में सक्षम है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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**भगवान विष्णु का मूल मंत्र**

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

**निष्कर्ष और उपाय**

पापमोचिनी एकादशी का व्रत मन, वचन और कर्म से किए गए सभी पापों का नाश करता है। यह व्रत न केवल भौतिक सुख प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ शिव परिवार की पूजा का भी महत्व है। व्रत के नियमों का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर व्यक्ति को निश्चित रूप से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। व्रत के दिन अन्न का त्याग करें, फलाहार करें और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखें।

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