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फ़रवरी, 11, 2026
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पौष अमावस्या 2025: पितरों की मुक्ति का महापर्व

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Paush Amavasya 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष मास की अमावस्या तिथि का भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में अत्यंत विशेष स्थान है। यह दिन पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विभिन्न अनुष्ठान करने हेतु परम फलदायी माना गया है।

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पौष अमावस्या 2025: पितरों की मुक्ति का महापर्व

पौष अमावस्या 2025: इष्टकाल और इसका धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में Paush Amavasya 2025 का विशेष धार्मिक महत्व है। यह दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के कार्यों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। इस पवित्र तिथि पर इष्टकाल में की गई पूजा-अर्चना और विधि-विधान से किए गए कर्मकांड पूर्वजों को तृप्ति प्रदान करते हैं और परिवार में सुख-शांति लाते हैं। मान्यता है कि इस दिन दान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, जिससे यह आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए एक शक्तिशाली समय बन जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन किए गए कार्यों से कुंडली में पितृ दोष शांत होता है और जीवन से बाधाएं दूर होती हैं।

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पौष अमावस्या का महत्व और इष्टकाल

पौष अमावस्या पर पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्रद्धापूर्वक तर्पण और पिंडदान करने का विधान है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है या जो अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं। इष्टकाल वह शुभ मुहूर्त होता है जब किए गए धार्मिक कार्य सर्वोत्तम फल देते हैं। पौष अमावस्या पर इस इष्टकाल में स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। इससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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पौष अमावस्या पर पूजन विधि

इस पावन तिथि पर प्रातःकाल किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। पितरों के निमित्त तर्पण करें, जिसमें जल, तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न और दक्षिणा का दान करें। इस दिन गाय को चारा खिलाना और चींटियों को आटा डालना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठान करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता का भाव रखें।

विशेष मंत्र और उसका प्रभाव

पौष अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। यह मंत्र पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में भी सहायक होता है।

ॐ सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः। स्वधा स्वधा, पितृभ्यो नमः।
ॐ पितृभ्यः नमः, ॐ पितृ शांति नमः।

पौष अमावस्या के उपवास और लाभ

पौष अमावस्या का उपवास रखने से शरीर और मन शुद्ध होता है। यह उपवास न केवल पितरों को प्रसन्न करता है बल्कि व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्रदान करता है। इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

निष्कर्ष और उपाय

Paush Amavasya 2025 का दिन हमें अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का अवसर देता है। इस दिन किए गए दान, तर्पण और मंत्र जाप से व्यक्ति को पितृ आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। यदि आप अपने जीवन में शांति और समृद्धि लाना चाहते हैं, तो इस दिन श्रद्धापूर्वक इन अनुष्ठानों का पालन करें।

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