



Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन और फलदायी व्रत माना जाता है। इस दिन महादेव की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत: महादेव की कृपा पाने को करें शिव चालीसा का पाठ
प्रदोष व्रत के शुभ अवसर पर शिव महिमा का गुणगान
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसे विधि-विधान से करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पावन दिवस पर भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। प्रदोष काल में शिव आराधना का विशेष महत्व है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभफलदायी माना गया है, क्योंकि इससे महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
प्रदोष व्रत की महिमा और पूजन विधि
मान्यता है कि प्रदोष व्रत का अनुष्ठान करने से व्यक्ति को रोग-दोष से मुक्ति मिलती है और उसकी सभी परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत संतान प्राप्ति, धन-धान्य और मोक्ष के लिए भी उत्तम माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान शिव अपने भक्तों पर असीम कृपा करते हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए महादेव के मंत्रों का पाठ विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का संकल्प लें।
- शाम के समय प्रदोष काल में पुनः स्नान करें।
- एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- गंगाजल से अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, धूप, दीप, चंदन, सफेद पुष्प आदि अर्पित करें।
- भगवान शिव को भोग लगाएं।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार में प्रसाद वितरित करें।
महादेव के मंत्रों का महत्व
॥ श्री शिव चालीसा ॥
दोहा
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत शिव प्यारी॥
कर में त्रिशूल सोहत भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदी गणेश सोहैं तहं कैसे। सागर मध्य कमल हों जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणपति। अति आनंद लहत मुनि गणपति॥
देवन जब ही पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
भैया हरिनंदन को मारा। तुम जिन भक्तन को विस्तारा॥
दानादत्त नाम त्रिपुरारी। जिनका कोई न सके निवारी॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाकाल जब नाम सुनावै॥
काशी विश्वनाथ विराजत। नंदी महाराज नित सोहत॥
दर्शन से सब पाप नशावै। मन प्रसन्न हो आनंद पावै॥
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शंकर जी को जिसने ध्याया। संकट कटि सब सुख पाया॥
पुत्र हीन जो चाहा पाई। शंकर पूजा विधि विधि आई॥
रोग ग्रस्त जो रहता काया। उसका सब दुख दूर भगाया॥
लक्ष्मी चाहत जो कोई। शंकर पूजा फलित होई॥
दरिद्र को धन वैभव देता। हर कष्ट को हर लेता॥
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।दोहा
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ऋतु, संवत चौंसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
इस प्रकार, प्रदोष व्रत के पावन अवसर पर शिव चालीसा का भक्तिपूर्वक पाठ करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह एक ऐसा सरल उपाय है जिससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि शारीरिक और आत्मिक रूप से भी मनुष्य बलवान बनता है। प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।


