Premanand Ji Maharaj Teachings: वैवाहिक संबंध केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का पवित्र संगम है, जहां उनके भाग्य और कर्म भी आपस में गुंथे होते हैं।
प्रेमानंद जी महाराज के दिव्य Premanand Ji Maharaj Teachings: पति-पत्नी के कर्मों का फल
Premanand Ji Maharaj Teachings: कर्मों का सूक्ष्म विज्ञान और दांपत्य
वैदिक परंपरा में दांपत्य जीवन को एक यज्ञ के समान माना गया है, जहां प्रत्येक क्रिया, विचार और भावना का गहरा प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है। इस गहन विषय पर पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने अपनी अमृतवाणी में प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विवाह उपरांत पति और पत्नी दोनों के कर्मों का फल एक-दूसरे से जुड़ जाता है। यह एक ऐसा आध्यात्मिक सत्य है जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महाराज श्री बताते हैं कि यदि पत्नी कोई पुण्य कर्म करती है, तो उसका प्रतिफल पति को भी प्राप्त होता है, और इसी प्रकार, पति के सत्कर्मों का पुण्यफल पत्नी को भी मिलता है। यह परस्पर निर्भरता ही दांपत्य जीवन की दिव्यता है, जहां एक-दूसरे के उत्थान में सहायक बनना ही उनका परम धर्म बन जाता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह केवल लौकिक संबंध नहीं, बल्कि पारलौकिक यात्रा का भी आधार है। जब पति-पत्नी एक साथ मिलकर धर्म के मार्ग पर चलते हैं, सेवा करते हैं, या आध्यात्मिक साधना में लीन होते हैं, तो उनके सामूहिक प्रयासों का फल कई गुना बढ़ जाता है। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, यह कर्मों का अदृश्य बंधन ही उन्हें जन्म-जन्मांतर तक एक-दूसरे से जोड़े रखता है।
इस प्रकार, पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति सद्भाव और सहयोग की भावना रखनी चाहिए। दोनों को मिलकर ऐसे कार्य करने चाहिए जो धर्मसम्मत हों और जिनसे समाज का कल्याण हो। यही प्रेमानंद जी महाराज का संदेश है, जो एक सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



