



Premanand Ji Maharaj Ke Vichar: आध्यात्मिक गुरु श्री प्रेमानंद जी महाराज के पावन उपदेशों में जीवन की गूढ़ समस्याओं का सरल समाधान निहित है।
प्रेमानंद जी महाराज के विचार: नकारात्मकता से कैसे बचें और अपनी खुशियां कैसे सुरक्षित रखें?
खुशियों को ग्रहण लगने से बचाएं: प्रेमानंद जी महाराज के विचार
आमतौर पर देखा जाता है कि जब हमारे जीवन में सुख और संतोष का आगमन होता है, जब हम अपनी सफलताओं और खुशियों का आनंद ले रहे होते हैं, तब कुछ लोग अनजाने में या जानबूझकर ऐसी बातें कह जाते हैं, जिससे हमारा मन विचलित हो उठता है। ये छोटी सी बातें हमारी खुशियों के पलों को धीरे-धीरे अशांति में बदल देती हैं, और हम दिनभर उन्हीं विचारों में खोकर अपने बहुमूल्य समय और आनंद के क्षणों को व्यर्थ कर देते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि आखिर क्या किया जाए, कैसे इस नकारात्मकता से स्वयं को बचाया जाए। इस विषय पर पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने गहन चर्चा की है और इसका अत्यंत सरल एवं प्रभावी समाधान बताया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महाराज श्री का मानना है कि बाहरी परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, किंतु अपने मन की शांति को बनाए रखना पूर्णतः हमारे हाथ में है।
यह सत्य है कि जब हम प्रसन्न होते हैं, तब कुछ लोगों को हमारी यह प्रसन्नता रास नहीं आती। उनकी ईर्ष्या या नकारात्मकता के कारण वे कुछ ऐसे शब्द कह देते हैं, जो हमारे हृदय को भेद जाते हैं। ऐसे में हमें उन बातों पर अनावश्यक ध्यान देकर अपना मन अशांत नहीं करना चाहिए। प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए और अपनी खुशियों को अक्षुण्ण रखने के लिए हमें बाहरी हस्तक्षेपों को अपने भीतर प्रवेश करने से रोकना होगा। उन व्यक्तियों की बातों को अनसुना करना ही सबसे उत्तम मार्ग है, जो हमारी प्रगति से प्रसन्न नहीं होते। अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं और अपने आराध्य का स्मरण करें।
महाराज श्री बताते हैं कि जब कोई आपकी खुशियों से जलता है या आपकी तरक्की को बर्दाश्त नहीं कर पाता, तो इसका अर्थ है कि वे स्वयं आंतरिक रूप से अशांत हैं। ऐसे लोगों के प्रति करुणा का भाव रखें, किंतु उनकी बातों से स्वयं को प्रभावित न होने दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अपनी साधना और ईश्वर में विश्वास बनाए रखें। अपनी खुशियों को दूसरों की नकारात्मकता की भेंट न चढ़ने दें। स्वयं को उन विचारों से दूर रखें जो आपके मन की शांति भंग करते हैं।
सुखद जीवन का मार्ग
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, सुखद जीवन के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने अंतर्मन को सशक्त बनाएं। जब हम भीतर से मजबूत होते हैं, तो बाहरी कोई भी शक्ति हमें विचलित नहीं कर सकती। उन बातों पर ध्यान न दें, जो आपकी खुशियों को छीनने का प्रयास करती हैं।
समाधान और उपाय
पूज्य महाराज जी कहते हैं कि ऐसे समय में सबसे पहले अपने मन को शांत करें। अपनी आंखें बंद करें और कुछ देर के लिए अपने इष्टदेव का ध्यान करें। उन नकारात्मक बातों को अपने ऊपर हावी न होने दें। यह समझें कि यह उनका स्वभाव है, आपका नहीं। आप अपनी खुशियों के निर्माता स्वयं हैं। अपनी ऊर्जा को व्यर्थ की चिंता में न गंवाएं, बल्कि उसे अपने लक्ष्य की ओर लगाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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