



Rahu Ketu Story: ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों में राहु और केतु का विशेष स्थान है, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
Rahu Ketu Story: राहु-केतु का रहस्यमय प्रभाव, जीवन में अचानक सफलता और मोक्ष के कारक
वैदिक ज्योतिष में Rahu Ketu Story: इनके प्रभाव और उपाय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु और केतु को ‘छाया ग्रह’ की संज्ञा दी गई है। इनका भौतिक अस्तित्व न होते हुए भी, ये प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ये अदृश्य शक्तियाँ हैं, जो कर्मों के अनुसार फल प्रदान करती हैं और व्यक्ति को अप्रत्याशित रूप से फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती हैं, वहीं कभी-कभी अर्श से फर्श पर भी ला सकती हैं। राहु और केतु, आध्यात्मिक चेतना के सबसे बड़े कारक माने जाते हैं, जो जीवन में आकस्मिक परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी होते हैं। अक्सर लोग इन्हें केवल अशुभता से जोड़कर देखते हैं, परंतु यह एक भ्रांति है। इनकी सही स्थिति और गोचर व्यक्ति को अतुलनीय सफलता, मोक्ष और गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन छाया ग्रहों का जन्म समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जहाँ भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत पान करते समय स्वरभानु नामक राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया था। सिर वाला भाग राहु कहलाया और धड़ वाला भाग केतु। तभी से ये दोनों नवग्रहों में स्थान पाकर, सूर्य और चंद्र को ग्रहण लगाते हैं।
राहु और केतु के प्रभाव को समझने के लिए हमें कुंडली में इनकी स्थिति का गहन विश्लेषण करना पड़ता है। इनकी दशा-महादशा व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव लाती है, जो कई बार पूर्वजन्म के कर्मों से भी संबंधित होते हैं। दैनिक राशिफल और ज्योतिषीय गणनाओं के लिए यहां क्लिक करें। Rahu Ketu Story से जुड़े इन रहस्यमय तथ्यों को जानकर, आप अपने जीवन में इनके प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति के उपाय
ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। भगवान शिव और गणेश जी की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और नागराज वासुकि की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। शनिवार और मंगलवार के दिन राहु और केतु के मंत्रों का जाप, जैसे ‘ॐ रां राहवे नमः’ और ‘ॐ कें केतवे नमः’ भी अत्यंत प्रभावी होता है। इनके शुभ प्रभाव से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है और जीवन में सही दिशा प्राप्त करता है। यह आवश्यक है कि हम इन ग्रहों को भय के दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि इन्हें आत्म-विकास और आध्यात्मिक जागरण के एक अवसर के रूप में स्वीकार करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






