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फ़रवरी, 13, 2026
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राजयोग इन कुंडली: जब भाग्य संवारे ग्रहों की चाल

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Rajyoga in Kundli: ज्योतिष शास्त्र के गूढ़ रहस्यों में छिपा है हमारे भाग्य का विधान। ब्रह्मांड में ग्रहों की अनवरत चाल और उनकी विशिष्ट स्थितियां ही यह निर्धारित करती हैं कि व्यक्ति का जीवन कैसा होगा। क्या वह ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जियेगा या संघर्षों से भरा मार्ग उसके हिस्से आएगा। आइए, आज हम कुंडली के उन अद्भुत राजयोगों और धन योगों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं, जिनके प्रभाव से एक सामान्य व्यक्ति भी राजा के समान सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये योग व्यक्ति को रंक से राजा बनाने की सामर्थ्य रखते हैं, जिससे जीवन में भौतिक सुखों की कोई कमी नहीं रहती।

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राजयोग इन कुंडली: जब भाग्य संवारे ग्रहों की चाल

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जन्म कुंडली में कई ऐसे शुभ योग बनते हैं, जो व्यक्ति को अपार धन, मान-सम्मान और उच्च पद प्रदान करते हैं। इन योगों का निर्माण ग्रहों की विशेष युति, दृष्टि या भाव संबंधी स्थितियों से होता है। जब कुंडली में शुभ ग्रहों का प्रभाव केंद्र और त्रिकोण भावों में होता है, तो ऐसे योग राजयोग कहलाते हैं। इन राजयोगों के कारण व्यक्ति को असाधारण सफलता और वैभव की प्राप्ति होती है।

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राजयोग इन कुंडली: धनवान बनने के गुप्त रहस्य

कुंडली में राजयोग का निर्माण कई प्रकार से होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामी एक साथ किसी केंद्र या त्रिकोण भाव में विराजमान हों, तो यह एक अत्यंत प्रबल राजयोग कहलाता है। इसी प्रकार, दशम भाव का स्वामी नवम भाव में और नवम भाव का स्वामी दशम भाव में होने पर ‘धर्म-कर्माधिपति योग’ बनता है, जो व्यक्ति को बहुत यशस्वी और धनी बनाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह योग सरकार से लाभ और उच्च पद दिलाता है।

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एक अन्य महत्वपूर्ण धन योग तब बनता है जब द्वितीय भाव (धन भाव) और एकादश भाव (लाभ भाव) के स्वामी एक-दूसरे से संबंधित होते हैं, या शुभ ग्रहों के साथ युति करते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती। शुक्र और चंद्रमा की युति से बनने वाला गजकेसरी योग भी व्यक्ति को संपत्ति और समृद्धि प्रदान करता है।

Graha Gochar का भी इन योगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब अनुकूल ग्रहों का गोचर इन राजयोगों को सक्रिय करता है, तो व्यक्ति के जीवन में अचानक और तीव्र बदलाव देखने को मिलते हैं। उसे अप्रत्याशित लाभ और उन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं।

कुंडली के प्रमुख राजयोग और उनके प्रभाव

  • गजकेसरी योग: चंद्रमा और बृहस्पति के केंद्र में होने से यह योग बनता है। इससे व्यक्ति विद्वान, धनी और यशस्वी होता है।
  • रुचक योग: मंगल का अपनी उच्च राशि या स्वराशि में होकर केंद्र में स्थित होना। यह व्यक्ति को साहसी, प्रभावशाली और पराक्रमी बनाता है।
  • भद्र योग: बुध का अपनी उच्च राशि या स्वराशि में होकर केंद्र में स्थित होना। इससे व्यक्ति बुद्धिमान, कुशल वक्ता और व्यापारी बनता है।
  • हंस योग: गुरु का अपनी उच्च राशि या स्वराशि में होकर केंद्र में स्थित होना। यह व्यक्ति को ज्ञानी, धार्मिक और प्रतिष्ठित बनाता है।
  • मालव्य योग: शुक्र का अपनी उच्च राशि या स्वराशि में होकर केंद्र में स्थित होना। इससे व्यक्ति सुंदर, कलाप्रेमी और भौतिक सुखों से संपन्न होता है।
  • शश योग: शनि का अपनी उच्च राशि या स्वराशि में होकर केंद्र में स्थित होना। यह व्यक्ति को न्यायप्रिय, दीर्घायु और उच्च पदस्थ बनाता है।

ये सभी योग व्यक्ति को जीवन में अद्वितीय सफलता और सुख प्रदान करते हैं। हालांकि, इन योगों की पूर्ण शक्ति ग्रहों की स्थिति, बल और अन्य कुंडली के कारकों पर निर्भर करती है।

राजयोग का फल और जीवन पर प्रभाव

जिन जातकों की कुंडली में ऐसे प्रबल राजयोग होते हैं, वे अक्सर साधारण पृष्ठभूमि से उठकर असाधारण ऊंचाइयों को छूते हैं। उन्हें समाज में मान-सम्मान, धन-संपत्ति, उच्च पद और अथाह सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। ये लोग अपने कर्मों और भाग्य के बल पर एक राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं। उनकी जीवन शैली में विलासिता और समृद्धि का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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**निष्कर्ष:**
जन्म कुंडली में राजयोगों और धन योगों का होना व्यक्ति के भाग्य का एक स्वर्णिम अध्याय खोलता है। ये योग व्यक्ति को न केवल भौतिक सुख प्रदान करते हैं, बल्कि उसे आध्यात्मिक और मानसिक शांति भी देते हैं। अपनी कुंडली का विश्लेषण किसी अनुभवी ज्योतिषी से करवाकर आप इन योगों की पहचान कर सकते हैं और इनके सकारात्मक प्रभावों को और अधिक बढ़ाने के लिए उचित उपाय भी जान सकते हैं। ग्रहों की कृपा से हर व्यक्ति अपने जीवन में समृद्धि और सफलता प्राप्त कर सकता है।

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