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फ़रवरी, 20, 2026
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Ramzan 2026: पहले जुमे की बरकत और नन्हे रोज़ेदारों का जज़्बा

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Ramzan 2026: रहमतों और बरकतों का माह-ए-रमज़ान अपने आगमन के साथ ही दुनिया भर के मुसलमानों के दिलों में एक विशेष शांति और आध्यात्मिक उत्साह भर देता है। यह पवित्र माह आत्म-शुद्धि, त्याग और अल्लाह की इबादत में लीन होने का अनुपम अवसर प्रदान करता है।

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Ramzan 2026: पहले जुमे की बरकत और नन्हे रोज़ेदारों का जज़्बा

Ramzan 2026: पाक महीने का पहला जुमा और नन्हे रोजेदारों की मिसाल

मुक़द्दस माह-ए-रमज़ान का पहला जुमा अपने साथ विशेष रहमतें लेकर आता है, जब हर मुसलमान खुदा की इबादत में मशगूल होकर अमन और भाईचारे की दुआ करता है। इसी पाक अवसर पर, जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी निष्ठा के साथ रोज़ा रखकर अल्लाह की रज़ा हासिल करने में लगे रहे, वहीं फुलवारी शरीफ के विभिन्न अंचलों में दो नन्हे बच्चों ने भी रोज़ा रखकर एक अद्भुत मिसाल पेश की है। यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा। इन नन्हे रोजेदारों ने यह दर्शाया कि आस्था और दृढ़ संकल्प की कोई उम्र नहीं होती। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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नया टोला क्षेत्र में मात्र पांच वर्ष की नन्ही उरूज आफताब ने अपना पहला रोज़ा रखा, जिसकी मासूमियत और श्रद्धा ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, हारूननगर सेक्टर–2 में सात वर्षीय मोहम्मद हनज़ल हुसैन ने भी रमज़ान के इस पहले जुमे का रोज़ा पूरी लगन से रखकर सभी का दिल जीत लिया। इन दोनों ही परिवारों में इस शुभ अवसर पर खुशी और गर्व का माहौल व्याप्त रहा, क्योंकि उनके बच्चों ने इतनी कम उम्र में ही इस पवित्र परंपरा का निर्वहन किया। ऐसे क्षण समाज में सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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यह भी पढ़ें:  रमजान 2026 First Jumma: इबादत और दुआओं का संगम

निष्कर्ष:

रमज़ान का यह पहला जुमा न केवल सामूहिक इबादत का प्रतीक था, बल्कि नन्हे रोज़ेदारों के माध्यम से इसने यह भी संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी में भी धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पवित्र महीना हमें त्याग, संयम और परोपकार की शिक्षा देता है, जिससे समाज में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। इन बच्चों का यह कृत्य दूसरों को भी प्रेरित करेगा कि वे इस पवित्र माह की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें और अल्लाह की रहमतें प्राप्त करें।

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