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मार्च, 6, 2026
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रथ सप्तमी 2026: सूर्यदेव की आराधना और आरोग्य का दिव्य आशीर्वाद

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Ratha Saptami 2026: सनातन धर्म में रथ सप्तमी का पर्व भगवान सूर्यदेव को समर्पित एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण दिवस माना जाता है। इस दिन भक्तजन पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से सूर्यदेव की आराधना करते हैं, जिससे उन्हें आरोग्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन भगवान सूर्य के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जब उन्होंने पहली बार सृष्टि को अपनी स्वर्णिम रश्मियों से प्रकाशित किया था।

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रथ सप्तमी 2026: सूर्यदेव की आराधना और आरोग्य का दिव्य आशीर्वाद

स्कंद पुराण और भविष्य पुराण सहित कई प्राचीन धर्मग्रंथों में रथ सप्तमी के महात्म्य का वर्णन मिलता है। इस पावन बेला में सूर्यदेव की स्तुति कर भक्तगण उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना करते हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बिना आरती के कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति अपनी भावनाओं और कृतज्ञता को व्यक्त करते हैं। रथ सप्तमी के अवसर पर सूर्यदेव की आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पूजा को पूर्णता प्रदान करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

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Ratha Saptami 2026: सूर्य आरती का महत्व और विधि

रथ सप्तमी के दिन सूर्यदेव की पूजा के उपरांत उनकी आरती का गान अवश्य करना चाहिए। यह आरती भगवान सूर्य को समर्पित है और इसका गान करने से मन को शांति व आरोग्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां भगवान सूर्य को समर्पित एक दिव्य आरती प्रस्तुत की गई है, जिसका पाठ करने से व्यक्ति सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति पा सकता है।

”’
ओम जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जग के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिभुवन प्राण॥
ओम जय सूर्य भगवान…

सारथी अरुण तुम्हारा, श्वेत कमल दल धारी।
तुमने हैं सब फैलाये, षड ऋतुएँ बारी-बारी॥
ओम जय सूर्य भगवान…

सकल सृष्टि के पालक, तुम ही हो जीवन दाता।
ताप हरक, दुख नाशक, हो तुम ही भाग्य विधाता॥
ओम जय सूर्य भगवान…

सुबह-सुबह जब रवि उगते, मन में ज्योति जगाते।
हर एक कण में शक्ति भर, जीवन नव दिखलाते॥
ओम जय सूर्य भगवान…

तुम ही ब्रह्मा, तुम ही विष्णु, तुम ही शिव रूप।
देवों के हो तुम ही स्वामी, तुम हो अनुपम स्वरूप॥
ओम जय सूर्य भगवान…
”’

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रथ सप्तमी के दिन के उपाय

रथ सप्तमी के पावन पर्व पर स्नान के उपरांत सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्यदेव को “ओम घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें। इसके साथ ही इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और यथाशक्ति दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। रथ सप्तमी के दिन इस आरती का नियमित पाठ आपको असीम ऊर्जा और सफलता प्रदान करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व हमें प्रकृति के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/

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